नागपुर, 15 अक्टूबर।
देश में विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और युवाओं में बढ़ते असंतोष को माओवादी संगठन अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगे संगठन के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच कथित गोपनीय पत्र से यह आशंका सामने आई है। महाराष्ट्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने ऐसे पत्र के मिलने की पुष्टि की है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, माओवादी संगठन के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ में सक्रिय कॉमरेड धीरज ने वरिष्ठ पदाधिकारी कॉमरेड अजीत उर्फ के. मुरलीधरन को यह पत्र भेजा है। इसमें ‘वाईवाई’ नाम से उल्लेखित व्यक्ति द्वारा सरकार विरोधी आंदोलनों के लिए विशेष रणनीति तैयार किए जाने की बात कही गई है।
युवाओं को आंदोलन का केंद्र बनाने की कथित योजना
पत्र में आगामी जनआंदोलनों और राजनीतिक संघर्षों को तेज करने के लिए जेन जी नेटवर्क का उपयोग करने की योजना का उल्लेख होने का दावा किया गया है। इसके तहत अलग-अलग मुद्दों पर सरकार के खिलाफ मौजूद असंतोष को व्यापक बनाने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की रणनीति बताए जाने की जानकारी है।
कथित कार्ययोजना में जमीनी स्तर पर सरकार विरोधी अभियान चलाने, आंदोलनों का दायरा बढ़ाने और राजनीतिक दबाव बनाने जैसे बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं। यह दावा भी किया गया है कि प्रदर्शनों के दौरान हिंसा या अप्रिय घटनाएं होने पर सरकार को जिम्मेदार ठहराने की रणनीति पर विचार किया गया है।
सात राज्यों में भूमिगत सहयोगियों को जोड़ने का दावा
कथित पत्र में महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में सक्रिय भूमिगत शहरी माओवादी सहयोगियों को फिर से संगठित करने की योजना का भी उल्लेख बताया जा रहा है।
इन दावों के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि तय समय-सारणी के अनुसार सरकार विरोधी आंदोलनों को अधिक व्यापक और आक्रामक रूप देने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, पत्र में दर्ज कथित दावों की स्वतंत्र पुष्टि होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
भारत जोड़ो अभियान से आंदोलनों को जोड़ने का कथित उल्लेख
इस मामले में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान चलाए गए भारत जोड़ो अभियान से संबंधित कथित योजना भी चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, पत्र में ‘वाईवाई’ नाम से उल्लिखित व्यक्ति की रणनीति के तहत जेन जी और सरकार विरोधी रुख रखने वाले युवाओं के आंदोलनों को इस अभियान से जोड़ने की बात कही गई है।
कथित पत्र में विभिन्न आंदोलनों को साझा मंच पर लाकर सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक दबाव बनाने की योजना का दावा किया गया है। कुछ राजनीतिक दलों की ओर से ऐसे संयुक्त प्रयासों में शामिल होने की सहमति का उल्लेख होने की बात भी कही जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।














