वायु सेना को मिलेगा समर्पित संचार उपग्रह
रक्षा मंत्रालय ने जीसैट-7सी की खरीद के लिए बेंगलुरु स्थित न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ अनुबंध किया है। स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित यह उपग्रह वायु सेना के संसाधनों के बीच सुरक्षित, सुदृढ़ और निर्बाध संचार क्षमता बढ़ाएगा। इससे वायु सेना की परिचालन क्षमता को मजबूती मिलेगी।
पनडुब्बियों को निशाना बनाने में सक्षम वरुणास्त्र
नौसेना के लिए वरुणास्त्र की खरीद हैदराबाद स्थित भारत डायनामिक्स लिमिटेड से की जाएगी। नौसेना की विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में विकसित यह पोत से प्रक्षेपित किया जाने वाला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो है। यह दिशा बदलने की उन्नत क्षमता से लैस है और लंबी दूरी से दुश्मन की पनडुब्बियों को निशाना बना सकता है। इससे नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता बढ़ेगी।
आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों अनुबंधों पर नई दिल्ली में रक्षा अधिग्रहण विभाग के अपर सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबारासु की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों से घरेलू रक्षा विनिर्माण और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। दोनों अनुबंध सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।














