कोलकाता, 15 अक्टूबर।
बिहार की कला, सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने गुरुवार को कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (ईजेडसीसी) में आयोजित समीक्षा बैठक में यह बात कही।
2026-27 में 10 सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रस्ताव
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान बिहार में 10 प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इनमें नाटक, रंगमंच, पारंपरिक संगीत और विभिन्न सांस्कृतिक महोत्सवों को प्रमुखता दी गई है।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से बिहार की लोककलाओं और नाट्य परंपराओं का प्रचार-प्रसार करने तथा स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
कलाकारों को मिलेंगे नए अवसर
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार की कला और संस्कृति राज्य की गौरवशाली सभ्यता, ऐतिहासिक परंपराओं और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। कलाकारों को प्रोत्साहित करना और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए देशभर में उसका प्रसार करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कलाकारों को नए अवसर दिए जाएंगे और बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में ईजेडसीसी के निदेशक सुदेश शर्मा और उप निदेशक (कार्यक्रम) डॉ. तपस कुमार सामंतराय सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इंडियन म्यूजियम का भी किया दौरा
बैठक के बाद मंत्री ने कोलकाता के ऐतिहासिक इंडियन म्यूजियम और एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कला, कलात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक एवं कलात्मक पहलुओं का अवलोकन किया।














