काठमांडू, 15 अक्टूबर।
नेपाल सरकार को राजदूतों की नियुक्ति के मामले में झटका लगा है। संसदीय सुनवाई समिति ने सऊदी अरब के लिए प्रस्तावित गिरिबहादुर सुनार और मलेशिया के लिए नामित चूडामणि खरेल की नियुक्ति को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। समिति की बुधवार को हुई बैठक में दोनों नामों पर सहमति नहीं बनी।
गिरिबहादुर सुनार के खिलाफ महिला हिंसा और चूडामणि खरेल के खिलाफ आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामलों के कारण उनकी सिफारिशें अस्वीकार की गईं। जापान के लिए प्रस्तावित राजदूत ज्ञान कुमार थापा की नियुक्ति पर भी फिलहाल फैसला नहीं लिया गया है। समिति ने अतिरिक्त जानकारी मिलने के बाद ही उनके नाम पर निर्णय करने का फैसला किया।
विवादित नामों पर समिति का सख्त रुखदो प्रस्तावित राजदूतों के नाम सर्वसम्मति से खारिज होने के बाद सरकार की सिफारिशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोपों से घिरे व्यक्तियों को राजदूत पद के लिए नामित किए जाने पर चर्चा तेज हो गई है।
संसदीय सुनवाई समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बोधनारायण श्रेष्ठ कर रहे हैं। समिति में इसी पार्टी का बहुमत है। इसके बावजूद दोनों नामों को सर्वसम्मति से अस्वीकार किए जाने के फैसले को समिति की स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्यप्रणाली के रूप में देखा जा रहा है।
नेपाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी यूएमएल के नेता योगेश भट्टराई ने भी इस फैसले की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संसदीय सुनवाई समिति ने दूसरी बार इतिहास रचा है और इस निर्णय से समिति की प्रासंगिकता साबित हुई है। उन्होंने फैसले पर खुशी जताते हुए बधाई दी।
भारत समेत 10 देशों के राजदूतों को मंजूरीसमिति ने बैठक में 10 अन्य देशों के लिए प्रस्तावित राजदूतों के नामों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। भारत के लिए डॉ. निश्चल राज पांडे, चीन के लिए डॉ. कल्याण राज शर्मा और अमेरिका के लिए चिरनजंग थापा के नाम स्वीकृत किए गए हैं।
ब्रिटेन के लिए गौरव शमशेर जबरा, इजरायल के लिए सुरेश कुमार कर्ण, दक्षिण कोरिया के लिए डॉ. संगम श्रेष्ठ और स्पेन के लिए प्राप्ति शेरचन को मंजूरी मिली है।
इसी तरह श्रीलंका के लिए डॉ. मञ्चला झा, जर्मनी के लिए सरु जोशी और ओमान के लिए डॉ. पद्माक्षी राणा के नामों पर भी समिति ने सहमति जताई।
13 देशों के लिए हुई थी सिफारिशनेपाल सरकार ने लंबे समय से खाली पड़े राजदूत पदों को भरने के लिए 2 अक्टूबर को 13 देशों में नियुक्ति हेतु नामों की सिफारिश की थी। संसदीय सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के दौरान दो प्रस्तावित राजदूतों के नाम अस्वीकार कर दिए गए, एक नाम पर फैसला रोक दिया गया और 10 नामों को मंजूरी मिली।













