‘सरकार का समर्थन करने वालों की राय का भी सम्मान हो’
अनुपम खेर ने कहा कि प्रदर्शन करने वालों की तरह सरकार का समर्थन करने वाले नागरिकों के विचारों का भी सम्मान होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी प्रदर्शन के समर्थन में अपनी बात रख सकता है, तो अलग राय रखने वालों को भी ऐसा करने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक सोच अलग होने के बावजूद एक-दूसरे का अपमान किए बिना अपनी बात रखी जा सकती है।
प्रधानमंत्री और उनकी मां पर टिप्पणियों से नाराजगी
अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर नाराजगी जताई। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों सहित पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि या चाय बेचने जैसे काम को अपमान का विषय बनाना गलत है। उन्होंने अपने पिता के वन विभाग में क्लर्क होने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें अपनी पृष्ठभूमि पर गर्व है।
‘वोट चोरी के आरोप हैं तो सबूत दें’
चुनाव में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अनुपम ने प्रमाण प्रस्तुत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिकायतों के लिए कानूनी और संवैधानिक रास्ते अपनाए जाने चाहिए तथा निष्पक्ष जांच की मांग की जा सकती है। केवल आरोप लगाने से कोई दावा साबित नहीं होता।
अनुपम खेर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर भरोसा करके मतदान किया था और पिछले 12 वर्षों में देश के लिए किए गए कार्यों को देखकर उनका विश्वास कायम है। उन्होंने सरकार बदलने के इच्छुक लोगों से चुनाव के माध्यम से जनता का समर्थन हासिल करने की बात भी कही।
‘आलोचना के डर से अपनी बात नहीं रोकूंगा’
अभिनेता ने कहा कि अपनी राजनीतिक राय रखने के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ‘अंधभक्त’ या ‘दलाल’ कहा जा सकता है, लेकिन वह इससे डरकर चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए दादा की सीख भी साझा की—‘भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता।’
अनुपम के अनुसार, लोकतंत्र में असहमति जरूरी है, लेकिन बहस तर्क, तथ्यों और मर्यादा के साथ होनी चाहिए।














