जोधपुर, 17 अक्टूबर।
राजस्थान के फलोदी जिले में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे नौ वर्षीय भोमाराम को करीब 39 घंटे के बचाव अभियान के बाद बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। शुक्रवार देर रात करीब 3:35 बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:30 बजे पूनिया की ढाणी में भोमाराम बोरवेल में गिर गया था और लगभग 640 फीट की गहराई पर फंस गया था। घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों ने बचाव अभियान शुरू किया। कैमरे के जरिए बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही थी, लेकिन 16 अक्टूबर की सुबह कैमरे में उसकी हलचल दिखाई देना बंद हो गई। बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बोरवेल में बच्चे से करीब 30 फीट ऊपर फंसा एक बड़ा पत्थर बना, जिसके कारण उपकरणों को नीचे पहुंचाने में मुश्किल हो रही थी।
करीब 34 घंटे की मशक्कत के बाद देसी तकनीक की मदद से पत्थर को बाहर निकाला गया। इसके बाद बच्चे को सुरक्षित निकालने के लिए मादाराम और उनकी टीम ने लोहे की पत्तियों को वेल्डिंग करके एक विशेष उपकरण तैयार किया। कैमरे से मिले दृश्यों के आधार पर उपकरण को बोरवेल की बनावट के अनुरूप आकार दिया गया, ताकि उसे नीचे उतारते समय आसपास की मिट्टी और ढांचे पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। उपकरण में चिमटे जैसी पकड़ बनाने वाला लॉक लगाया गया, जिससे बच्चे को पकड़कर रस्सी के सहारे धीरे-धीरे ऊपर खींचने की कोशिश की गई। लंबे प्रयासों के बाद भोमाराम को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर उसकी मौत की पुष्टि हुई। पूरे अभियान के दौरान परिजन और ग्रामीण बच्चे के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए रहे, लेकिन अंततः परिवार की उम्मीदें टूट गईं।














