देहरादून, 17 अक्टूबर।
उत्तराखंड में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने और वितरण के दौरान होने वाले नुकसान को घटाने के लिए ऊर्जा निगम ने अभियान तेज कर दिया है। पुलिस की मदद से कुमाऊं मंडल में चल रही कार्रवाई के तहत 250 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बिजली चोरी के मामलों में सख्ती बरतने और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल की सहायता लेने के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा निगम के सामने मैदानी इलाकों में वितरण हानि कम करना बड़ी चुनौती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गदरपुर में बिजली वितरण हानि 30.58 प्रतिशत, जसपुर में 27 प्रतिशत, खटीमा में 53 प्रतिशत, लक्सर में 27 प्रतिशत, लंढौरा में 69.40 प्रतिशत, मंगलौर में 47.62 प्रतिशत और सितारगंज में 27.25 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों में बिजली चोरी, बकाया बिलों का भुगतान न होना और तकनीकी कारणों से होने वाली हानि जैसे कारक शामिल हैं। ऊर्जा निगम के कुल वितरण नुकसान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह वित्तीय वर्ष 2021-22 में 14.70 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 16.39 प्रतिशत हो गया और 2023-24 में घटकर 15.63 प्रतिशत रह गया।
नुकसान कम करने के लिए ऊर्जा निगम तकनीकी निगरानी भी बढ़ा रहा है। ट्रांसफार्मर स्तर पर बिजली की आपूर्ति और खपत का मिलान करने के लिए दोहरे मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी जहां आपूर्ति और बिल की गई खपत में अंतर है। कुमाऊं क्षेत्र में हल्द्वानी, रामनगर और काशीपुर में पुलिस की सहायता से चलाए गए अभियान के दौरान 250 से अधिक मामले दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध होने पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बिजली चोरी से होने वाला आर्थिक नुकसान ऊर्जा विभाग के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को भी प्रभावित करता है। इसलिए चोरी रोकने, बकाया बिलों की वसूली और वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।














