‘फंड फॉर रिस्पॉन्डिंग टू लॉस एंड डैमेज’ के गठन के बाद किसी विशिष्ट आपदा के लिए सहायता पर विचार करने के उद्देश्य से पहली बार इस तरह की विशेष बैठक होने जा रही है। नेपाल ने भोटेकोशी बाढ़ से हुए नुकसान के बाद 31 अगस्त को कोष से आपातकालीन सहायता मांगी थी।
नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने कोष को पत्र लिखकर जलवायु न्याय के सिद्धांत के तहत मुआवजे की मांग की थी। इसके बाद कोष के बोर्ड ने सहायता उपलब्ध कराने के लिए विचार-विमर्श और समन्वय की जानकारी दी।
बैठक में आपातकालीन सहायता के लिए आवेदन की लंबी और जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी चर्चा होगी। सदस्य देशों और नागरिक समाज की ओर से आपदा के बाद सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने की मांग उठाई जा रही है।
नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के प्रारंभिक सर्वेक्षण के अनुसार, भोटेकोशी बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में करीब 79 अरब 60 करोड़ नेपाली रुपये की क्षति का अनुमान है। नेपाल ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 4 अरब 71 करोड़ अमेरिकी डॉलर की जरूरत बताई है।
प्रस्तावित 2 करोड़ डॉलर की सहायता पुनर्निर्माण के लिए अनुमानित जरूरत के 0.5 प्रतिशत से भी कम है। इससे जलवायु परिवर्तन से प्रभावित देशों की जरूरतों और उन्हें मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता के बीच का अंतर सामने आता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी कोष में पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की अपील कर चुके हैं।













