महासमुंद, 21 अक्टूबर।
छत्तीसगढ़ की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। महानदी के तट पर स्थित यह ऐतिहासिक स्थल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध विहारों और विशिष्ट वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इस उपलब्धि से सिरपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को नई दिशा मिली है।
महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बुधवार को बताया कि जिले की इस ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को यूनेस्को की संभावित सूची में स्थान मिला है। यूनेस्को की आधिकारिक वेबसाइट पर सिरपुर को तीसरे क्रम पर सूचीबद्ध किया गया है।
प्राचीन काल में सिरपुर को श्रीपुर के नाम से जाना जाता था। पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में यह दक्षिण कोसल की राजधानी रहा। इस क्षेत्र की प्राचीनता के प्रमाण शरभपुरीय शासक प्रवरराज और महासुदेवराज के ताम्रपत्रों में मिलते हैं।
मंदिरों और बौद्ध विहारों का ऐतिहासिक केंद्र
महाशिवगुप्त बालार्जुन के लंबे शासनकाल में सिरपुर में अनेक मंदिरों, बौद्ध विहारों, सरोवरों और उद्यानों का निर्माण कराया गया। सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री और विद्वान ह्वेनसांग ने भी सिरपुर की यात्रा की थी। उस समय यहां लगभग 100 संघाराम थे और महायान बौद्ध संप्रदाय के करीब 10 हजार भिक्षु निवास करते थे।
शैव मत के अनुयायी होने के बावजूद महाशिवगुप्त बालार्जुन ने बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक दान देकर संरक्षण प्रदान किया था। यह तथ्य सिरपुर की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
संरक्षण और संवर्धन पर जोर
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 1 जनवरी 2026 को सिरपुर के पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण किया था। उस दौरान उन्होंने इनके संरक्षण और विकास के लिए काम करने तथा सिरपुर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात कही थी।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद रूपकुमारी चौधरी, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होना सिरपुर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।














