दशहरा उत्सव के अंतिम चरण में निकली यह यात्रा राजमहल से रवाना होकर बन्नीमंटप तक पहुंची। स्वर्ण अंबारी में विराजमान मां चामुंडेश्वरी की झांकी शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रही। इससे पहले दोपहर 1:36 से 1:56 बजे तक मकर लग्न के शुभ समय में मुख्यमंत्री ने राजमहल के किले आंजनेय स्वामी मंदिर के सामने नंदी ध्वजों की पूजा की। इसके बाद शोभायात्रा को रवाना किया गया।
अभिमन्यु ने हाथियों के दल का किया नेतृत्व
राजमहल से निकली शोभायात्रा में अभिमन्यु ध्वजवाहक हाथी के रूप में सबसे आगे चला। उसके पीछे नौपत हाथी और तीन कतारों में अन्य गजराज शामिल हुए। हाथियों की भव्यता, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और विभिन्न कला दलों की प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
शोभायात्रा में अलग-अलग विभागों और संगठनों की झांकियां भी शामिल रहीं। पुलिस बैंड, अन्य वाद्य दलों और अश्वदल ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। इस बार प्रशांत हाथी ने पहली बार स्वर्ण अंबारी धारण कर शोभायात्रा में भाग लिया।
सुरक्षा के लिए पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
जंबू सवारी को देखते हुए मैसूरु में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। प्रमुख स्थानों, चौराहों और शोभायात्रा के पूरे मार्ग पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था में पांच हजार से अधिक पुलिसकर्मी लगाए गए थे।
इसके अलावा कर्नाटक राज्य आरक्षित पुलिस बल, नगर सशस्त्र आरक्षित बल और जिला सशस्त्र आरक्षित बल की 33 टुकड़ियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शोभायात्रा मार्ग पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई। मां चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित कर शुरू हुई यह भव्य यात्रा राजमहल से बन्नीमंटप पहुंचने के साथ संपन्न हुई।














