नई दिल्ली, 21 अक्टूबर।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) द्वारा अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिका बुधवार को वापस ले ली। उच्च न्यायालय द्वारा मामले की त्वरित सुनवाई पर सहमति व्यक्त किए जाने के तुरंत बाद नेताओं ने यह कदम उठाया है, जबकि दशहरा अवकाश के कारण इस सप्ताह उच्च न्यायालय बंद है। सीजेपी नेताओं को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रवेश करने और राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। एसईएम द्वारा 19 अक्टूबर को दी गई दो दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद, बुधवार को होने वाली अगली सुनवाई के आधार पर पार्टी अपनी भावी कानूनी रणनीति तय करेगी।
इसी बीच, न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा दायर एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई करेंगे। नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 के तहत शांति बनाए रखने हेतु 10,000 रुपये का मुचलका भरने के संबंध में जारी 17 अक्टूबर के कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी है। बोरा को 16 अक्टूबर को उस समय निवारक हिरासत में लिया गया था, जब उन्हें सीजेपी के 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में शामिल होने से रोक दिया गया था। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने दास और रांका के खिलाफ दर्ज दूसरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है, जबकि सीजेपी ने आरोप लगाया है कि दोनों नेताओं की रिहाई रोकने के लिए जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।














