रायगढ़, 22 अक्टूबर।
ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आजीविका मजबूत करने के लिए स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के खम्हार पाकुट जलाशय में मछली पालन 52 आदिवासी मछुआरों के लिए आय का अच्छा जरिया बन गया है। समिति ने 75 क्विंटल मछली का उत्पादन कर 10.50 लाख रुपये की आय अर्जित की और खर्चों के बाद 7.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।खम्हार पाकुट सिंचाई जलाशय में समिति योजनाबद्ध तरीके से मछली पालन कर रही है। 191.340 हेक्टेयर औसत जलक्षेत्र वाले इस जलाशय को समिति ने 10 साल के पट्टे पर लेकर यह काम शुरू किया है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से सदस्यों को प्रशिक्षण और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। जलाशय के संसाधनों का उपयोग करते हुए समिति के सदस्य सामूहिक रूप से मछली उत्पादन और बिक्री करते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।समिति के सदस्यों ने बताया कि जलाशय में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब दो लाख मछली बीज डाले गए थे। इसके बाद 75 क्विंटल मछली का उत्पादन हुआ। मछलियों की बिक्री से समिति को 10.50 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई, जिसमें से खर्चों के बाद 7.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला।प्रशिक्षण और उपकरणों से मिली मददविभागीय अधिकारियों के अनुसार, मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत समिति के सदस्यों को मछली पालन का प्रशिक्षण दिया गया है। मछली पकड़ने के लिए जाल और मछलियों को सुरक्षित रखने के लिए बर्फ रखने वाले डिब्बे भी उपलब्ध कराए गए हैं। इन संसाधनों से मछली पकड़ने, उनके रखरखाव और बिक्री में सुविधा मिली है।खम्हार पाकुट की आदिवासी मछुआ सहकारी समिति के 52 सदस्य मछली पालन के माध्यम से आय अर्जित कर रहे हैं। यह पहल स्थानीय संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आजीविका मजबूत करने का माध्यम बन रही है।














