दरभंगा में महारानी कामसुन्दरी साहिबा के 94वें जन्मदिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनकी स्मृति में महिला सम्मान पुरस्कार शुरू करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सुझाव दिया गया।
दरभंगा, 22 अक्टूबर।
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन में फाउंडेशन की दाता न्यासी स्वर्गीय महारानी कामसुन्दरी साहिबा के 94वें जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर विद्वानों, शिक्षाविदों और इतिहास के अध्येताओं ने उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही, उनके सांस्कृतिक योगदान और विरासत को याद किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. इंदिरा झा ने कहा कि ऐतिहासिक स्मृतियों और धरोहरों का संरक्षण समाज में ऐतिहासिक चेतना बनाए रखने के लिए आवश्यक है। विशिष्ट वक्ता प्रो. पुतुल सिंह ने मैथिली भाषा, लोक संस्कृति के संरक्षण और महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया।इस दौरान प्रो. शिरीष चन्द्र चौधरी ने महारानी कामसुन्दरी साहिबा की स्मृति में महिला सम्मान पुरस्कार शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल के माध्यम से महिलाओं के योगदान को सम्मानित करने के साथ महारानी की स्मृतियों को भी जीवंत रखा जा सकता है।डॉ. अवनीन्द्र कुमार झा ने ऐतिहासिक दस्तावेजों के संकलन और उनके प्रामाणिक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता बताई। वहीं, डॉ. मंज़र सुलैमान ने मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत में दरभंगा राज के योगदान को रेखांकित किया। डॉ. जमील हसन अंसारी ने ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित रखने पर बल दिया।सभा की अध्यक्षता पंडित डॉ. रामचन्द्र झा ने की। वक्ताओं ने महारानी के जन्मदिवस पर प्रत्येक वर्ष कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता जताई। कार्यक्रम के प्रारंभ में फाउंडेशन के कार्यपालक पदाधिकारी श्रुतिकर झा ने अतिथियों का स्वागत किया।