वाराणसी, 22 अक्टूबर।
गंगा महासभा के तत्वावधान में छठी संस्कृति संसद का आयोजन 3 से 5 नवंबर तक वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में किया जाएगा। अखिल भारतीय संत समिति और काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में होने वाले इस आयोजन में करीब दो हजार संतों और सात हजार युवाओं के शामिल होने का दावा किया गया है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील देवधर ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि संस्कृति संसद की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े कलाकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाना है। इसके बाद हर दो वर्ष में इसका आयोजन किया जाता रहा है। इस बार इसका छठा संस्करण आयोजित होगा।
हिंदू समाज की चुनौतियों और राष्ट्रवाद पर होगी चर्चा
देवधर के अनुसार, संस्कृति संसद में हिंदू समाज के सामने मौजूद चुनौतियों, हिंदुत्व को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक विमर्श और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही हिंदू समाज में जागरूकता बढ़ाने और भारत को विश्वगुरु बनाने के उद्देश्य से एक स्वैच्छिक आचार संहिता प्रस्तुत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस बार सात हजार युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। उनके मुताबिक, युवा देशभक्ति, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व से जुड़े विचारों को लेकर अपनी भागीदारी दर्ज कराएंगे।
मनुस्मृति को लेकर फैली भ्रांतियों पर भी चर्चा
देवधर ने कहा कि संस्कृति संसद में मनुस्मृति को लेकर प्रचलित धारणाओं और भ्रांतियों पर भी चर्चा होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों द्वारा किए गए अनुवादों और तत्कालीन नीतियों के कारण इस विषय को लेकर गलतफहमियां पैदा हुईं। उन्होंने कहा कि दलित, वंचित और शोषित समुदायों के संदर्भ में भी इन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
त्योहारों के दौरान आंदोलनों पर उठाए सवाल
पत्रकार वार्ता में देवधर ने विपक्षी दलों के आंदोलनों के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नवरात्रि और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान होने वाले आंदोलनों से छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी लगाने वालों के कारोबार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय बाजारों में खरीदारी बढ़ती है और ऐसे में व्यापारियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
संस्कृति संसद में इन मुद्दों पर चर्चा के साथ हिंदू समाज में जागरूकता और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श किए जाने की योजना है।














