वाराणसी, 24 अक्टूबर।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय की पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. उत्तमा दीक्षित 2 नवंबर को जर्मनी की राजधानी बर्लिन के प्रतिष्ठित टैगोर सेंटर में अपनी एकल कला प्रदर्शनी ‘द फॉरेस्ट सीरीज’ प्रस्तुत करेंगी। शोधपरक इस प्रदर्शनी के माध्यम से कला और पर्यावरण संरक्षण के बीच संबंधों को रेखांकित किया जाएगा। लगभग तीन दशकों के कलात्मक और शैक्षणिक अनुभव वाली प्रो. दीक्षित ने भारतीय लोक कला, सांस्कृतिक परंपराओं और समकालीन कलात्मक अभिव्यक्तियों के क्षेत्र में योगदान दिया है। काशी की लोक चित्रकला पर आधारित उनकी पुस्तक और बार्सिलोना, फ्लोरेंस, इंडोनेशिया के मैगलंग संस्थान, नेपाल तथा वियना में मिले अंतरराष्ट्रीय अनुभवों ने उनकी कला को व्यापक दृष्टिकोण दिया है। उनकी ‘द फॉरेस्ट सीरीज’ मध्य भारत के घने जंगलों, वहां की जैव विविधता और आदिवासी लोक कलाओं में मौजूद सांस्कृतिक प्रतीकों से प्रेरित है। इसमें वनों की अंधाधुंध कटाई, जैव विविधता के संरक्षण और प्रकृति तथा मानव जीवन के गहरे संबंधों को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। प्रदर्शनी का उद्देश्य पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता को सामने लाना है।
प्रदर्शनी के दौरान प्रो. दीक्षित कला, पर्यावरण और पारिस्थितिक स्थिरता के परस्पर संबंधों पर व्याख्यान भी देंगी। इसके बाद वह दर्शकों के सामने सजीव चित्रांकन करेंगी, जिसमें रंगों और ब्रश के माध्यम से उनकी रचनात्मक प्रक्रिया को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के जरिए भारतीय समकालीन कला की रचनात्मकता, बौद्धिक गहराई और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। प्रो. दीक्षित की यह पहल काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक कला मंच तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे दृश्य कला के विद्यार्थियों, युवा कलाकारों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कला जगत से जुड़ने तथा नए रचनात्मक और शैक्षणिक अवसरों की संभावनाओं को समझने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है। प्रदर्शनी कला के जरिए प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देगी, ताकि पर्यावरण की सुंदरता केवल चित्रों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक जीवन में भी सुरक्षित रखी जा सके।














