नई दिल्ली, 17 मार्च।
काकोरी प्रतिरोध शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में ऐतिहासिक नाटक “काकोरी क्रांति गाथा” का मंचन किया गया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया। यह कार्यक्रम साहित्य कला परिषद (दिल्ली सरकार) एवं सभ्यता अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित किया गया और स्वतंत्रता संग्राम के उन पहलुओं को उजागर किया गया जो इतिहास के पन्नों में कहीं छिपे हुए थे।
सिल्ली सोल्स फाउंडेशन द्वारा निर्मित इस नाटक का लेखन रवि शंकर और निर्देशन प्रियंका शर्मा ने किया। मंचन में दर्शकों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन क्रांतिकारियों के साहस और बलिदान को महसूस किया, जिन्हें अक्सर केवल 'ट्रेन डकैती' के रूप में देखा गया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सभ्यता अध्ययन केंद्र के संरक्षक डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि काकोरी की घटना केवल ट्रेन लूटने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला कर रख दिया। नाटक के लेखक रवि शंकर ने स्वागत भाषण में बताया कि यह क्रांति ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संगठित प्रतिरोध का प्रतीक थी।
9 अगस्त, 1925 को भारतीय क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश खजाने से भरी ट्रेन को काकोरी के पास रोककर अपने कब्जे में लिया। इस साहसिक कार्य में पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद और मन्मथनाथ गुप्त जैसे क्रांतिकारी शामिल थे। नाटक में उनके चरित्र, संवाद और बलिदान क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए।
नाटक में तिलका मांझी, रामजी गोंड और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जैसे व्यक्तित्वों का योगदान भी दिखाया गया, जिससे दर्शकों को भारतीय प्रतिरोध की व्यापक झलक देखने को मिली।
सिल्ली सोल्स फाउंडेशन की संस्थापक प्रियंका शर्मा ने कहा कि यह नाटक केवल ऐतिहासिक कथा नहीं बल्कि भावनात्मक और वैचारिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो युवाओं को राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा देता है।
सभ्यता अध्ययन केंद्र के उपाध्यक्ष प्रकाश शर्मा ने कहा कि शताब्दी वर्ष के इस अवसर पर हमारा उद्देश्य इन वीरों की गौरवगाथा को राष्ट्रीय स्मृति में स्थापित करना है, ताकि युवा पीढ़ी उनके साहस, एकता और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित हो सके।
मंचन में समाज के विभिन्न वर्गों के बुद्धिजीवी और युवा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में गुजरात के पूर्व मंत्री नरेश रावल, उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य वागीश पाठक और आध्यात्मिक गुरु दीपांकर स्वामी दीपांकर ने इस प्रयास की सराहना की।












