बुडापेस्ट, 12 अप्रैल 2026।
हंगरी में संसदीय चुनाव के लिए सुबह छह बजे मतदान शुरू हो गया, जिसमें मौजूदा प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान और विपक्षी नेता पीटर माग्यार के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है, जबकि यह चुनाव वैश्विक राजनीतिक हलचल का कारण बना हुआ है।
देश में 16 वर्षों से सत्ता में बने प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान को विपक्षी पार्टी तिसा के नेता पीटर माग्यार कड़ी चुनौती दे रहे हैं और मतदान शाम सात बजे समाप्त होने की घोषणा की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार यह चुनाव अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के आरोपों के बीच हो रहा है, जिससे यूरोपीय संघ की चिंताएं बढ़ गई हैं और वैश्विक स्तर पर इस पर नजर बनी हुई है।
मतदान से पहले ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा ओर्बान को आगामी प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरम हो गया है।
विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका को यह आशंका है कि यदि ओर्बान चुनाव हारते हैं तो हंगरी का झुकाव रूस की ओर बढ़ सकता है, जिससे यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ सकता है।
ओर्बान यूरोपीय संघ की शरणार्थी नीति के कड़े विरोधी माने जाते हैं और उनकी विचारधारा को अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूढ़िवादी रुख से भी जोड़ा जाता है।
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में विपक्षी नेता पीटर माग्यार को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे मुकाबला और अधिक रोचक और संघर्षपूर्ण हो गया है।
प्रधानमंत्री ओर्बान ने मतदान से पहले एक रैली में कहा कि यह चुनाव देश के भीतर और बाहर रहने वाले हंगरीवासियों के भविष्य के लिए निर्णायक है और इसके परिणाम दूरगामी होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि इन समुदायों के हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत सरकार की आवश्यकता है और उन्होंने विश्वास जताया कि जनता एक बार फिर उन्हें समर्थन देगी।
ओर्बान ने यूरोपीय संघ की यूक्रेन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदस्य देशों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने की योजना चिंताजनक है और इससे वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से अंततः सदस्य देशों को ही कर्ज चुकाना पड़ेगा और हंगरी इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा।
प्रधानमंत्री ने युद्ध के शुरुआती दौर में हंगरी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने जरूरतमंदों की मदद की और मानवता के प्रति अपना कर्तव्य निभाया।
उन्होंने सस्ती रूसी ऊर्जा की उपलब्धता खत्म होने से घरेलू अर्थव्यवस्था और परिवारों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चेतावनी दी।
ओर्बान ने यह भी कहा कि उनकी सरकार टैक्स छूट और लोन योजनाओं को आगे भी जारी रखेगी और देश की सुरक्षा के लिए मजबूत जनसमर्थन आवश्यक है।









