नई दिल्ली, 12 अप्रैल 2026।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों के सभी दलों के फ्लोर लीडरों को पत्र लिखकर महिला आरक्षण को 2029 के चुनावों से पहले लागू करने के उद्देश्य से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के सर्वसम्मत पारित किए जाने के लिए समर्थन मांगा है।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने आगामी 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में इस विधेयक को पारित करने के महत्व पर जोर देते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा और उसके पारित होने के लिए विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा कि 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर ऐतिहासिक चर्चा होगी और यह अवसर लोकतंत्र को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, साथ ही सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराने का समय भी है।
उन्होंने कहा कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब महिलाओं को विकास, निर्णय लेने और नेतृत्व में समान अवसर मिले, और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी और भी अधिक जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2023 के उस क्षण को भी याद किया जब सभी दलों ने मिलकर इस विधेयक का समर्थन किया था और इसे एकता का प्रतीक बताया था, जिसने दुनिया को भी एक सकारात्मक संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि संसद में लिया गया वह निर्णय देश की महिलाओं के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक था और इसे लोकतांत्रिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कई सांसदों ने इसके क्रियान्वयन के समय पर चर्चा की थी और विशेषज्ञों एवं राजनीतिक दलों से परामर्श के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि अब इसे लागू करने का उचित समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देशभर में प्रभावी रूप से लागू करना आवश्यक है ताकि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सके और लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनकी भागीदारी बढ़े।
प्रधानमंत्री ने सभी दलों से एकजुट होकर इस संशोधन को पारित करने की अपील करते हुए इसे किसी भी दल या व्यक्ति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह अवसर महिलाओं और आने वाली पीढ़ियों के प्रति कर्तव्य निभाने का है और इसे गंवाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक परंपराएं और मजबूत होंगी।










