इस्लामाबाद, 12 अप्रैल 2026।
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के तहत हुई लगभग 15 घंटे लंबी वार्ता में लेबनान और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा, जबकि बातचीत का अगला दौर आज फिर होने की तैयारी है।
राजधानी इस्लामाबाद स्थित सेरेना होटल में शनिवार दोपहर से शुरू हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत देर रात तक जारी रही और लगभग 15 घंटे बाद रविवार तड़के समाप्त हुई, जिसमें दोनों पक्ष बार-बार अपने-अपने रुख पर अड़े रहे।
बताया गया कि वार्ता के दौरान ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी पक्ष की ओर से अनुचित मांगें रखी गईं, जबकि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर पूरी तरह दृढ़ है और किसी भी स्थिति में पीछे हटने को तैयार नहीं है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के अनुसार पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोनों पक्षों की सहमति से बातचीत का अगला दौर आज आयोजित किया जाएगा, जबकि इसे 1979 की क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच सबसे उच्चस्तरीय वार्ता माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार इससे पहले दोनों देशों के बीच आखिरी बड़ी बैठक वर्ष 2015 में हुई थी और वर्तमान वार्ता में अमेरिका और ईरान के शीर्ष स्तर के राजनीतिक प्रतिनिधि आमने-सामने हैं, जिनमें उपराष्ट्रपति और संसद अध्यक्ष शामिल बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक किसी भी ठोस प्रगति की संभावना नहीं है, वहीं वार्ता के दौरान कई बार मसौदों का आदान-प्रदान भी हुआ।
वार्ता के पांचवें दौर में दोनों पक्षों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के और सदस्य इस्लामाबाद पहुंचते रहे और मेजबान पाकिस्तान ने इस पूरे मामले पर मौन बनाए रखा।
इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त कर स्थायी शांति स्थापित करना है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित किया है, और यह प्रक्रिया युद्धविराम के कुछ दिनों बाद शुरू हुई।
इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू की जा सकती है, जबकि ईरान ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव में अमेरिकी सेनाओं की वापसी और प्रतिबंध हटाने जैसी मांगें रखी हैं।
वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं और कुल 71 सदस्यीय दल इस्लामाबाद पहुंचा है।
पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसमें उसके शीर्ष नेतृत्व की अहम भूमिका रही है, वहीं इस बीच इजराइल ने लेबनान के साथ स्थायी शांति की इच्छा जताई है और सैन्य अभियान जारी रखने की बात भी कही है।
इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा है कि शांति समझौता तभी संभव है जब दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित हो और हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता समाप्त हो, जबकि क्षेत्र में हालिया सैन्य कार्रवाई को लेकर भी दावे सामने आए हैं।









