उज्जैन, 29 अक्टूबर।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के द्वार खुलते ही गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का भांग, चंदन और त्रिपुंड से श्रृंगार किया गया। इसके बाद रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित गुलाब के फूलों से भगवान को राजा स्वरूप प्रदान किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भी अभिषेक हुआ। धार्मिक मंत्रों और परंपराओं के बीच पूजा का क्रम आगे बढ़ा।
भस्म आरती की परंपरा के तहत सबसे पहले घंटाल बजाकर भगवान को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई। फिर ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म चढ़ाई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल भक्तों को साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं।
रजत आभूषणों और गुलाब के फूलों से किया विशेष श्रृंगार
भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक अलंकरण किया गया। भगवान के मस्तक पर चंदन और भांग से त्रिपुंड सजाया गया। इसके साथ रजत मुकुट, शेषनाग का मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। सुगंधित गुलाब के पुष्पों सहित विभिन्न आभूषणों से भगवान को सजाया गया। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। राजा स्वरूप में सजे बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
नंदी महाराज के दर्शन कर भक्तों ने मांगी मनोकामना पूर्ति
भस्म आरती में शामिल भक्तों ने भगवान महाकाल के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। परंपरा के अनुसार, कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। सुबह से मंदिर परिसर में भक्तों का आना-जाना लगा रहा। बाबा महाकाल के जयकारों और भस्म आरती के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।















