मुंबई, 26 अक्टूबर।
रस्क मीडिया की वेब सीरीज 'नाइन टू फाइव' युवाओं के करियर, रिश्तों और अधूरी सफलताओं से जुड़े संघर्षों को सहज अंदाज में सामने लाती है। व्योम चराया के निर्देशन में बनी यह सीरीज बताती है कि सफलता का अर्थ हमेशा पहला स्थान हासिल करना नहीं है, बल्कि अपनी कमजोरियों को पहचानकर आगे बढ़ना भी बड़ी उपलब्धि है।
सीरीज में प्रीत कमानी, राजेश कुमार, भाग्यश्री लिमये, अजितेश गुप्ता और तान्या शर्मा ने अभिनय किया है। इसका प्रदर्शन यूट्यूब पर किया गया है। सीरीज को 5 में से 3.5 अंक दिए जा सकते हैं।
कहानी
कहानी अनुज (प्रीत कमानी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो किवी एप नामक स्टार्टअप में नौकरी पाने के लिए साक्षात्कार देने पहुंचता है। वह घबराया हुआ है, लेकिन कंपनी के विपणन और रणनीति प्रमुख दीपक (राजेश कुमार) के सामने साक्षात्कार देने के बाद उसे नौकरी मिल जाती है। यह उसके लिए नई शुरुआत है, लेकिन जीवन में बार-बार सफलता के करीब पहुंचकर पीछे रह जाने की उसकी आदत अब भी बनी हुई है।
अनुज का दोस्त सूजल इसी वजह से उसे 'ऑलमोस्ट कुमार' कहता है। नई नौकरी की खुशी के बीच उसे मकान मालिक का फ्लैट खाली करने का निर्देश भी मिल जाता है। कार्यालय में उसकी मुलाकात यशस्विनी यानी यश (भाग्यश्री लिमये) से होती है, जो आत्मविश्वास से भरी और अपने काम में कुशल है।
दूसरी ओर, अनुज नए कार्यस्थल पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करता है। पिछली अधूरी सफलताएं उसे निराश करती रहती हैं। ऐसे में दीपक उसे समझाते हैं कि सफलता के करीब पहुंचना भी आगे बढ़ने का संकेत है। उनका संवाद 'मेक द मोस्ट आउट ऑफ ऑलमोस्ट' अनुज को अपनी परिस्थितियों के प्रति नजरिया बदलने की प्रेरणा देता है। दोस्ती और प्रेम के नए अनुभवों के बीच अब सवाल यही है कि क्या वह इस बार अपनी कोशिशों को सफलता में बदल पाएगा।
अभिनय
प्रीत कमानी ने अनुज के रूप में एक ऐसे युवा की भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है, जो अपनी क्षमताओं को साबित करना चाहता है, लेकिन असफलता की आशंका से भी घिरा रहता है। उनका सहज अभिनय किरदार को विश्वसनीय बनाता है।
राजेश कुमार दीपक की भूमिका में अपने संवादों और हास्यपूर्ण अंदाज से कहानी में हल्कापन बनाए रखते हैं। अनुज को समझाने वाले दृश्यों में भी उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है। भाग्यश्री लिमये ने यश के किरदार को आत्मविश्वास और स्वाभाविकता के साथ निभाया है। उनकी संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाएं भूमिका को प्रभावशाली बनाती हैं। तान्या शर्मा सहित अन्य सहायक कलाकारों का योगदान भी कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
लेखन और निर्देशन
सिद्धार्थ तिवारी और व्योम चराया ने कहानी का आधार बार-बार सफलता के करीब पहुंचकर पीछे रह जाने वाले युवा के अनुभवों को बनाया है। यह विचार सामान्य होने के बावजूद जीवन की वास्तविक निराशाओं को समझने का अवसर देता है।
कहानी में अनुज की नौकरी से जुड़ी परेशानियों के साथ उसके निजी संबंधों को भी जगह दी गई है। इससे उसका संघर्ष केवल पेशेवर जीवन तक सीमित नहीं रहता। निर्देशक व्योम चराया ने कार्यालय की चुनौतियों, हास्यपूर्ण प्रसंगों और भावनात्मक पलों को सहज तरीके से प्रस्तुत किया है।
अनुज किसी असाधारण नायक के बजाय आम युवा की तरह नजर आता है, जो अपने जीवन में बेहतर करने की कोशिश कर रहा है। यही पहलू कहानी को दर्शकों के करीब लाता है। हालांकि, करियर, दोस्ती और प्रेम से जुड़े कुछ प्रसंगों को अधिक कसाव के साथ दिखाया जा सकता था। इसके बावजूद मूल विचार और संवाद दर्शकों की रुचि बनाए रखते हैं।
अंतिम फैसला
'नाइन टू फाइव' उन युवाओं की कहानी है, जो बार-बार सफलता के करीब पहुंचने के बाद भी खुद को पीछे महसूस करते हैं। प्रीत कमानी का स्वाभाविक अभिनय, राजेश कुमार के प्रभावशाली संवाद और भाग्यश्री लिमये की मौजूदगी इसे देखने योग्य बनाती है।
सीरीज का संदेश है कि कामयाबी केवल पहला स्थान हासिल करने में नहीं, बल्कि गलतियों से सीखने, खुद पर विश्वास रखने और लगातार प्रयास करते रहने में भी है। करियर बनाने की चिंता, असफलता का डर और रिश्तों को संभालने की चुनौतियां अलग-अलग उम्र के लोगों के अनुभवों से जुड़ी हैं।
कुल मिलाकर, यह सीरीज रोजमर्रा के संघर्षों और उम्मीदों को मनोरंजक तरीके से पेश करती है। युवाओं के करियर, रिश्तों और आत्मविश्वास पर आधारित कहानियां पसंद करने वाले दर्शक इसे देख सकते हैं।










