पश्चिम एशिया में होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव, तेल और गैस आपूर्ति पर असर, भारत सहित कई देशों की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच आशा और अनिश्चितता का दौर जारी है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और अधिक जटिल होता जा रहा है और इसका केंद्र बिंदु होरमुज जलडमरूमध्य बन चुका है। भारत सहित पांच मित्र देशों को इस मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति ईरान ने दी है, लेकिन अमेरिका द्वारा खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तैनाती की तैयारी ने तनाव को और बढ़ा दिया है। इस वैश्विक परिदृश्य में आशा और निराशा का एक साथ खेल जारी है।
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा होरमुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करना एक प्रभावी रणनीति के रूप में सामने आया है। इसका सीधा असर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर पड़ा है। कई ऐसे देश, जो इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं हैं और केवल कूटनीतिक समाधान का समर्थन करते हैं, वे भी इस संकट की चपेट में आ गए हैं।
भारत ने भी पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है। संभवतः इसी संतुलित रुख के कारण ईरान ने चीन और रूस के साथ भारत को भी अपने जहाजों को इस मार्ग से ले जाने की अनुमति दी है। हालांकि भारत के चार जहाज इस मार्ग से निकल चुके हैं, लेकिन अभी भी अठारह जहाज फंसे हुए हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। हाल के घटनाक्रमों के बाद तेल और गैस की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।
हालांकि भारत सरकार का दावा है कि देश के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर रसोई गैस, ईंधन और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और कालाबाजारी की खबरें इस चिंता को और बढ़ा रही हैं।
सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और वर्तमान भंडार लगभग 60 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, आगामी दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है और घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
इस पूरे संकट के बीच यह भी समझना आवश्यक है कि हर सूचना सही नहीं होती। कई बार अफवाहें और अधूरी जानकारी लोगों में भय पैदा करती हैं, जिसका फायदा मुनाफाखोर उठाते हैं। इसलिए नागरिकों को केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए और अनावश्यक वस्तुओं की खरीद से बचना चाहिए।
वर्तमान परिस्थिति में घबराने के बजाय संयम और समझदारी से काम लेने की जरूरत है। यदि लोग केवल जरूरत के अनुसार ही वस्तुएं खरीदें और अफवाहों से दूर रहें, तो किसी भी कृत्रिम संकट को टाला जा सकता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी पक्षों को शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि इस संकट का स्थायी समाधान निकल सके।