कोलकाता, 24 मार्च।
रसोई गैस के बाद अब ऑटो में इस्तेमाल होने वाली गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने तीन पहिया वाहन चालकों को आर्थिक दबाव में डाल दिया है। मात्र एक सप्ताह के भीतर ऑटो गैस की कीमत में प्रति लीटर लगभग 13 रुपये की बढ़ोतरी के बाद सोमवार से शहर के कई प्रमुख मार्गों पर किराए में पांच से 10 रुपये की वृद्धि की गई। इससे आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है और नियमित यात्रियों में नाराजगी देखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, पिछले बुधवार तक ऑटो गैस की कीमत 62.68 रुपये प्रति लीटर थी, जो शुक्रवार से बढ़कर 70.68 रुपये हो गई। इससे ठीक एक सप्ताह पहले भी कीमत में पांच रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। यानी कम समय में ईंधन लागत में कुल 13 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
इस मूल्यवृद्धि का असर उल्टाडांगा से साल्टलेक सेक्टर पांच मार्ग पर देखा गया। मंगलवार से यात्रियों को इस रूट पर पांच रुपये अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है। उल्टाडांगा स्टेशन के पास ऑटो स्टैंड पर लगाए नोटिस के अनुसार, उल्टाडांगा से सेक्टर पांच तक का किराया 40 रुपये कर दिया गया है। वहीं 12 नंबर टैंक या सुश्रुत अस्पताल तक का किराया 25 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये किया गया है। यूनियन ने कहा कि भविष्य में गैस की कीमत कम होने या आपूर्ति सामान्य होने पर किराया कम करने पर विचार किया जाएगा।
उत्तर कोलकाता से दक्षिण कोलकाता तक भी स्थिति समान है। फूलबागान से गिरीश पार्क और मानिकतला रूट पर किराया दो–तीन रुपये बढ़ा है। सिंथी मोड़ से दमदम स्टेशन तक किराया 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये किया गया।
दक्षिण कोलकाता के गोलपार्क–गड़िया, टॉलीगंज–जादवपुर, रानीकुठी–बाघाजतिन, पार्क सर्कस–धर्मतला, जोका–तारातला और टॉलीगंज फाड़ी–ठाकुरपुकुर रूटों पर आधिकारिक रूप से किराया नहीं बढ़ाया गया, लेकिन कई चालकों द्वारा पांच से 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
सेक्टर पांच की आईटी कंपनी में कार्यरत तनया चौधुरी ने कहा कि अचानक यात्रा खर्च बढ़ने से मासिक बजट प्रभावित होगा और सरकारी हस्तक्षेप जरूरी है।
ऑटो यूनियनों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण किराया बढ़ाना पड़ा। साल्टलेक के एक यूनियन नेता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की आपूर्ति कम होने से कीमतें असामान्य रूप से बढ़ गई हैं और पुराने किराए पर वाहन चलाना संभव नहीं रहा। गोलपार्क–गड़िया रूट के एक यूनियन प्रतिनिधि ने कहा कि औपचारिक रूप से किराया नहीं बढ़ाया गया, लेकिन कई रूटों पर चालक अतिरिक्त किराया ले रहे हैं।
राज्य परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि ऑटो किराया नियंत्रित करने का स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं है। ऐसे में यूनियनें अपने स्तर पर किराया तय करती हैं, हालांकि विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
परिवहन विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम लोगों की परेशानी कम होने की संभावना नहीं है।












