बाड़मेर, 02 मई।
जिले के सनावड़ा मेघवालों की बस्ती स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब 13 बच्चों की अचानक तबीयत खराब हो गई। बच्चों के शरीर पर खुजली और लाल निशान उभरने के बाद स्कूल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी बच्चों को अस्पताल भेजा।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को स्कूल में ‘नो बैग डे’ मनाया जा रहा था, और छात्र-छात्राएं सामान्य गतिविधियों में व्यस्त थे। लंच से पहले एक बच्ची को तेज खुजली होने लगी, और उसके शरीर पर लाल चकत्ते दिखने लगे। स्कूल स्टाफ ने तत्काल बच्ची के परिजनों को सूचित कर उसे अस्पताल भेजा, लेकिन कुछ ही समय में तीन-चार अन्य बच्चों को भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देने लगे।
धीरे-धीरे 13 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सभी बच्चों को पहले सनावड़ा अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बाड़मेर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
एंबुलेंस के इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन ने बताया कि बच्चों की तबीयत खराब होने के बाद जांच में यह बात सामने आई कि बच्चों ने पानी पीने के बाद स्कूल के बाहर बिकने वाली ‘चुस्की’ भी खाई थी। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय होकर स्थिति का जायजा लिया।
एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और बच्चों की स्थिति का निरीक्षण किया। जिला शिक्षा अधिकारी देवाराम चौधरी ने बताया कि बच्चों ने घर से भोजन किया था और स्कूल में मिड-डे मील तैयार हो रहा था, लेकिन बच्चों की तबीयत उसके सेवन से पहले ही खराब हो गई थी। फिलहाल पानी और चुस्की को संभावित कारण माना जा रहा है और जांच की प्रक्रिया जारी है।
बाड़मेर जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. हनुमान चौधरी ने बताया कि सभी बच्चों की हालत स्थिर है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और पानी के स्रोत और चुस्की के नमूनों की जांच करवाई जा सकती है ताकि बीमारी के असल कारणों का पता चल सके।



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