लखनऊ, 30 मार्च।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रधर्म के राजेन्द्रनगर कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण परिचर्चा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने भारतीय ज्ञान परम्परा की विशिष्टता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यहां के ऋषियों ने सनातन परम्परा के ज्ञान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जो गहन प्रयास किए, वे सभी के लिए प्रेरक हैं।

स्वांत रंजन की अध्यक्षता में आचार्य सायण के कृतित्व और व्यक्तित्व पर विशेष विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान आचार्य सायण पर केन्द्रित पुस्तक "महामनीषी" पर चर्चा करते हुए विद्वान् लेखक पद्मनाभ पाण्डेय ने बताया कि आचार्य सायण न केवल वेदों पर भाष्य करने वाले महान विद्वान थे, बल्कि एक प्रचंड योद्धा, महामंत्री और आदर्श सद्गृहस्थ भी थे। उन्होंने कहा कि किसी सभ्यता की महानता उसके साहित्य और संस्कृति में निहित होती है, और आचार्य सायण ने वेदों पर अपने भाष्य के माध्यम से इस गौरवशाली परम्परा को और समृद्ध किया।
पद्मनाथ पाण्डेय ने परिचर्चा में यह भी कहा कि आचार्य सायण शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण, तपस्वी, त्यागी और महान अध्येता थे। इस कार्यक्रम में संतोष तिवारी, मृत्युंजय दीक्षित, राजीव द्विवेदी, जीशान अहमद, गौसियार खानम, जय प्रकाश पाण्डेय, विजय त्रिपाठी सहित कई विद्वान और समाजसेवी उपस्थित रहे।











