नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा को जीवन सुधारने और श्रेष्ठ बनाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल आजीविका के लिए नहीं है, बल्कि यह देश की युवा शक्ति को हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बनाने और भारत का नाम उज्ज्वल करने का आधार है।
प्रधानमंत्री ने आज एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें कहा गया है, “श्रियः प्रदुग्धे विपदो रुणद्धि यशांसि सूते मलिनं प्रमार्ष्टि। संस्कारशौचेन परं पुनीते शुद्धा हि बुद्धिः किल कामधेनुः॥” उन्होंने स्पष्ट किया कि शुद्ध और संस्कारित बुद्धि कामधेनु के समान है, जो समृद्धि बढ़ाती है, विपत्तियों को दूर करती है, यश प्रदान करती है और जीवन की दोषमुक्ति करती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सुभाषित के माध्यम से यह संदेश दिया कि शिक्षा और संस्कार से युक्त बुद्धि व्यक्ति और समाज दोनों को उन्नति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि ऐसी बुद्धि ही मनुष्य को सर्वोत्तम बनाती है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाती है।







