जबलपुर, 02 मई।
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में बरगी क्रूज हादसे के बाद प्रशासन ने मां नर्मदा के घाटों पर नाव संचालन पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी है। इस फैसले का सबसे अधिक असर गौरीघाट पर देखने को मिल रहा है, जहां इस आदेश के कारण लाखों लोग और नाविक समुदाय परेशान हो गए हैं।
गौरीघाट पर प्रतिदिन सैकड़ों लोग नर्मदा पार करते थे, जिनमें से अधिकांश दिहाड़ी मजदूर थे। ये मजदूर सुबह काम पर जाते और शाम को लौटते थे। अब नावों की सेवाएं बंद होने से उनका आवागमन रुक गया है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। यहां तक कि छोटी-बड़ी लगभग 100 नावों का संचालन भी प्रभावित हुआ है, जो पहले नर्मदा पार के गांवों के लोगों के लिए मुख्य परिवहन का साधन था।
नाव संचालन बंद होने से मल्लाह और बर्मन समाज के लोगों के सामने रोज़गार संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि इन समुदायों की मुख्य आय का स्रोत नाव संचालन ही था। वहीं, आम जनता को भी रोज़गार के लिए आवागमन में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से यह अपील की है कि सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए नाव संचालन फिर से शुरू किया जाए। व्यापारी संघ अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का कहना है कि नावों में लाइफ जैकेट अनिवार्य कर दी जाए, ताकि सुरक्षा बनी रहे और लोगों की आजीविका भी प्रभावित न हो।
गौरीघाट थाना प्रभारी हरिकिशन अटनेरे ने बताया कि प्रशासन के निर्देशानुसार नाव संचालन पर रोक लगी हुई है, और पुलिस घाटों पर पूरी तरह से सतर्क है।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन सुरक्षा और लोगों की समस्याओं के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाता है।











