रांची, 15 अप्रैल।
बोकारो से 18 वर्षीय युवती की गुमशुदगी से जुड़े मामले में बरामद नरकंकाल को लेकर बुधवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यह कंकाल युवती का नहीं है। वहीं सरकार की तरफ से कहा गया कि कंकाल का पोस्टमार्टम कराया जाएगा तथा एफएसएल और डीएनए जांच भी की जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि बरामद कंकाल की अब तक डीएनए जांच हुई है या नहीं और क्या इसके लिए युवती के माता-पिता के सैंपल लिए गए हैं। इस पर सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। सुनवाई में डीजीपी वर्चुअल रूप से उपस्थित रहीं।
अदालत ने मामले में डीजीपी, बोकारो एसपी, एफएसएल निदेशक और नई एसआईटी टीम को सभी दस्तावेजों के साथ गुरुवार को तलब किया है। सरकार और डीजीपी से संतोषजनक जवाब न मिलने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और कहा कि यदि एसआईटी जांच में लापरवाही पाई जाती है तो मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान डीजीपी से यह भी पूछा गया कि अब तक डीएनए टेस्ट क्यों नहीं हुआ और क्या अदालत के आदेश का इंतजार किया जा रहा है, जबकि कंकाल मिलने के तीन-चार दिन बीत चुके हैं। अदालत ने कहा कि माता-पिता और कंकाल के सैंपल लेकर कुछ ही घंटों में डीएनए जांच संभव है और परिणाम भी आ सकता है, फिर भी देरी क्यों की जा रही है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और अधिवक्ता शांतनु गुप्ता ने पक्ष रखा। मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय की खंडपीठ न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के समक्ष हुई। अदालत को सरकार की ओर से बताया गया कि आरोपी दिनेश महतो को गिरफ्तार किया गया है तथा लापता युवती का कंकाल बोकारो के जंगल से बरामद हुआ है। बोकारो एसपी ने लापरवाही के चलते पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी सहित 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि युवती की मां ने हेवियस कॉपस याचिका दायर की थी। युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी और इस संबंध में पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 147/2025 दर्ज किया गया था।









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