भोपाल, 24 अप्रैल।
प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि खेतों में नरवाई (पराली) जलाना न केवल कृषि भूमि के लिए हानिकारक है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
उन्होंने बताया कि किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान और इसके वैकल्पिक प्रबंधन के लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विभाग द्वारा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर ‘कृषि चौपाल’ के माध्यम से गांव-गांव जाकर किसानों को वैज्ञानिक तरीके से नरवाई प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है।
मंत्री के अनुसार रबी फसल की कटाई के बाद अप्रैल और मई माह में इस अभियान को विशेष रूप से तेज किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में कृषि चौपालों का आयोजन किया जा रहा है, जहां कृषि विज्ञान केंद्रों और कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता कमजोर हो जाती है और भूमि में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व एवं जैविक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेती की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके अलावा, इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ती है।
कृषि मंत्री ने कहा कि यदि किसान नरवाई को जलाने के बजाय खेत में ही मिला दें, तो इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ‘कृषि चौपाल’ में सक्रिय रूप से भाग लें और ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल के माध्यम से आधुनिक कृषि मशीनों के लिए आवेदन करें।










