नई दिल्ली, 24 अप्रैल।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, रक्षा मंत्री सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं और पंचायती राज संस्थाओं को भारतीय लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला बताया।
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि यह दिवस जमीनी लोकतंत्र और सहभागी शासन की भावना को सशक्त करने वाला अवसर है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाती है तथा समावेशी विकास को नई दिशा देती है, जिससे गांव स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित होती है।
उन्होंने आगे कहा कि पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन की धुरी के रूप में कार्य कर रही हैं और आत्मनिर्भर तथा सशक्त विकसित भारत के निर्माण में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि यह दिवस लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत करने तथा सतत विकास की दिशा में नए प्रयासों को प्रेरित करेगा।
रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सरकार पंचायती राज संस्थाओं को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे ग्राम उदय से भारत उदय का संकल्प आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पंचायत व्यवस्था भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो ग्रामीण विकास, सुशासन, सामाजिक न्याय, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था में पंचायतें आत्मनिर्भर बनकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे रही हैं।
विदेश मंत्री ने भी पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएँ दीं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था जनभागीदारी की वह मजबूत धारा है जो लोकतंत्र को पोषित करती है, और गांव की चौपाल से लेकर विकास के बड़े निर्णयों तक जनता की भागीदारी ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री के प्रयासों से गांवों को सशक्त बनाकर मुख्यधारा से जोड़ा गया और पंचायती राज के माध्यम से जनभागीदारी सुनिश्चित की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि पंचायती राज महिला सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है और सभी लोगों से आग्रह किया कि वे अपनी पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, जिससे गांवों का विकास हो और देश प्रगति की ओर अग्रसर हो सके।









