अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी आगामी चीन यात्रा के दौरान लंबी बातचीत होगी, लेकिन उन्हें इस मामले में बीजिंग की सहायता की आवश्यकता नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस से चीन रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के मामले को अपने तरीके से संभालने में सक्षम है और इस पर किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं समझता। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति चाहे कूटनीतिक हो या अन्य किसी तरीके से, परिणाम अमेरिका के पक्ष में ही रहेगा।
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने बैठक होगी जो छह महीने से अधिक समय बाद होने जा रही है। इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों में आई तनाव को कम करना है, जो व्यापार विवाद और ईरान संघर्ष सहित कई मुद्दों के कारण बढ़ गया था।
ट्रंप इस यात्रा पर उस समय चीन जा रहे हैं जब ईरान युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बना हुआ है और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया है। चीन ईरान के साथ अपने संबंध बनाए हुए है और उसके तेल का एक बड़ा उपभोक्ता भी माना जाता है।
अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से चीन पर दबाव बना रहा है कि वह ईरान को वार्ता के लिए प्रेरित करे, ताकि संघर्ष को समाप्त किया जा सके, जिसकी शुरुआत अमेरिका और इजरायल द्वारा फरवरी के अंत में किए गए हमलों के बाद हुई थी।
राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को बीजिंग पहुंचेंगे और गुरुवार तथा शुक्रवार को महत्वपूर्ण वार्ताएं प्रस्तावित हैं। यह वर्ष 2017 के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी।
उन्होंने आगे कहा कि चर्चा के लिए कई मुद्दे हैं, लेकिन ईरान उनमें मुख्य विषय नहीं होगा क्योंकि स्थिति उनके अनुसार नियंत्रण में है।








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