नई दिल्ली, 13 मई।
देश में साइबर अपराधों और म्यूल खातों पर अंकुश लगाने के लिए एक अहम कदम के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सहयोग को मजबूत करना है।
गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब के बीच हुए इस समझौते का मकसद देश के बैंकिंग और डिजिटल भुगतान तंत्र में हो रहे साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए मिलकर काम करना है। इसके जरिए धोखाधड़ी से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान और विश्लेषण को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सरकार साइबर सुरक्षित भारत के लिए लगातार प्रयास कर रही है और म्यूल खाते साइबर अपराधों में बड़ी बाधा बनते हैं, जिन्हें खत्म करने के लिए एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था संदिग्ध खातों की पहचान कर उन्हें तेजी से निष्क्रिय करने में मदद करेगी।
जानकारी के अनुसार, इस सहयोग के तहत “म्यूलहंटर” जैसी एआई आधारित प्रणालियों को और मजबूत किया जाएगा, जिन्हें पहले से ही बैंकों में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए संदिग्ध खातों से जुड़ा डेटा साझा कर एआई मॉडल को और सटीक बनाया जाएगा।
समझौते पर भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से वरिष्ठ अधिकारी और रिजर्व बैंक इनोवेशन हब के सीईओ ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर रिजर्व बैंक और गृह मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की साइबर अपराध से निपटने की क्षमता मजबूत होगी और डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था में लोगों का भरोसा और बढ़ेगा।
म्यूल खातों की निगरानी और साइबर खुफिया जानकारी साझा करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल जैसी व्यवस्थाओं के साथ यह नया सहयोग भारत की डिजिटल सुरक्षा ढांचे को और प्रभावी बनाएगा।











.jpg)