मध्य प्रदेश
15 May, 2026

मध्य प्रदेश के मंडला में दो दिवसीय आदि उत्सव की शुरुआत, रामनगर में दिखी जनजातीय परंपरा की झलक

मंडला के रामनगर में दो दिवसीय आदि उत्सव 2026 का शुभारंभ जनजातीय संस्कृति, गोंडवाना इतिहास और परंपराओं के भव्य प्रदर्शन के साथ किया जा रहा है जिसमें देशभर के प्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि शामिल हो रहे हैं।

मंडला, 15 मई।

मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल मंडला जिले की ऐतिहासिक नगरी रामनगर में आज शुक्रवार से दो दिवसीय “आदि उत्सव 2026” का शुभारंभ होने जा रहा है। गोंडकालीन राजाओं की राजधानी रहे रामनगर में आयोजित यह आयोजन जनजातीय संस्कृति, गोंडवाना इतिहास, पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव माना जा रहा है।

चौगान मढ़िया और रामनगर महल परिसर में आयोजित इस उत्सव में देशभर से जनजातीय समाज के प्रतिनिधि, राज परिवारों के सदस्य, लोक कलाकार और संस्कृति प्रेमी शामिल होंगे। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम इस महोत्सव का शुभारंभ दोपहर 12:30 बजे करेंगे।

जानकारी के अनुसार मंत्री ओराम आज ओडिशा के झारसुगुड़ा एयरपोर्ट से चार्टर्ड विमान द्वारा सुबह 10 बजे जबलपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे सुबह 10:20 बजे सड़क मार्ग से मंडला जिले के रामनगर के लिए रवाना होंगे और दोपहर 12 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर आदि उत्सव में भाग लेंगे। कार्यक्रम के बाद वे शाम 4:30 बजे वापस जबलपुर के लिए प्रस्थान करेंगे और फिर जबलपुर एयरपोर्ट से नई दिल्ली रवाना होंगे।

पहले दिन के कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे चौगान मढ़िया रामनगर में ध्वजारोहण और पारंपरिक आदि उत्सव शुभारंभ के साथ होगी। इसके बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन, स्मारक स्थल पर झंडा पूजन, नर्मदा पूजन और प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा। महल परिसर में विशेष पूजन-अर्चन भी आयोजित होगा, जिसमें जनजातीय परंपराओं और गोंडवाना संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

मंचीय कार्यक्रम के तहत दोपहर 12:20 बजे से दीप प्रज्वलन और मुख्य अतिथियों का स्वागत किया जाएगा। इस दौरान आदिवासी रियासतों के प्रतिनिधियों, विशिष्ट जनजातीय प्रतिभाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि प्राप्त व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। साथ ही पंडा-पुजारियों का भी सम्मान किया जाएगा। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी और मुख्य अतिथियों के उद्बोधन आयोजित किए जाएंगे।

दोपहर 3 बजे से उत्सव के दूसरे चरण की शुरुआत होगी, जिसमें देर रात तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। उत्तर-पूर्व भारत, मध्य भारत और प्रदेश स्तरीय सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। स्थानीय लोकनृत्य दलों द्वारा जनजातीय नृत्य और लोक संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति दी जाएगी। गोंड, बैगा और अन्य जनजातीय समुदायों की कला, संगीत और परंपराओं का विशेष प्रदर्शन किया जाएगा।

इस आयोजन में विभिन्न राज परिवारों के सदस्य भी शामिल होकर गोंडवाना की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक परंपराओं को सम्मान देंगे। प्रमुख अतिथियों में अनेक राजपरिवारों के सदस्य, सामाजिक प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां शामिल रहेंगी।

आदि उत्सव के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। दूसरे दिन महल परिसर में संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें जनजातीय साहित्य और इतिहास के विशेषज्ञ वक्ता शामिल होंगे। इसमें कई शिक्षाविद, शोधकर्ता, समाजसेवी और कलाकार अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम को भव्य और यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। यह उत्सव गोंडवाना संस्कृति, इतिहास और जनजातीय अस्मिता के महापर्व के रूप में देखा जा रहा है।

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