संपादकीय
12 Jun, 2026

देश के पांच हजार युवा बनेंगे देशी-विदेशी पर्यटकों के सारथी

ग्वालियर स्थित आईआईटीटीएम द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत देश के पांच शहरों में कल्चरल एंबेसडर तैयार किए जाएंगे, जिससे पर्यटन क्षेत्र में रोजगार बढ़ने के साथ भारत की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन छवि को मजबूत करने और पर्यटकों को सुरक्षित व बेहतर अनुभव देने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्वालियर, 12 जून।

भारत को विश्व की पर्यटन राजधानी बनाने का सपना अब केवल पर्यटन मंत्रालय की फाइलों में नहीं, बल्कि ग्वालियर की कक्षाओं में आकार ले रहा है। भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (आईआईटीटीएम), ग्वालियर ने देश के पांच शहरों के लिए पांच हजार युवाओं को कल्चरल एंबेसडर बनाने का बीड़ा उठाया है। पहले चरण में दो हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह पहल केवल रोजगार नहीं देगी, बल्कि "अतिथि देवो भव" की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा को 21वीं सदी के प्रोफेशनलिज्म से भी जोड़ेगी।

अक्सर विदेशी पर्यटक भारत आकर भाषा, स्थानीय संस्कृति और सुरक्षा को लेकर असहज महसूस करते हैं। उन्हें गाइड तो मिल जाता है, लेकिन कई बार वह कमीशन के चक्कर में पर्यटकों को दुकान-दुकान घुमाता रहता है। आईआईटीटीएम की यह योजना इसी छवि को बदलने का प्रयास है। संस्थान के निदेशक प्रो. आलोक शर्मा के अनुसार, ये युवा केवल स्मारकों का इतिहास नहीं बताएंगे, बल्कि स्टोरीटेलर की भूमिका निभाएंगे। ग्वालियर का किला अजेय क्यों माना जाता था, ओरछा के रामराजा मंदिर में भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर क्यों दिया जाता है या तानसेन की तान से दीपक जलने की किंवदंतियां क्या हैं, वे इन कथाओं को रोचक ढंग से प्रस्तुत करेंगे। साथ ही डिजिटल भुगतान, आपातकालीन सहायता, महिला पर्यटकों की सुरक्षा और स्थानीय कानूनों की जानकारी भी देंगे।

पहले चरण में ग्वालियर, खजुराहो, ओरछा, भोपाल और इंदौर के दो हजार युवाओं का चयन किया गया है। दस हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। तीन माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में इतिहास, कम्युनिकेशन स्किल, फर्स्ट एड, सेल्फ डिफेंस, विदेशी भाषाओं का प्रारंभिक ज्ञान और एआई टूल्स का प्रशिक्षण शामिल होगा। कोर्स पूरा होने पर पर्यटन मंत्रालय का प्रमाणपत्र दिया जाएगा और इन्हें "इन्क्रेडिबल इंडिया स्मार्ट गाइड" का दर्जा मिलेगा।

इस पहल की आवश्यकता इसलिए भी महसूस हुई क्योंकि भारत की पर्यटन छवि को ओवरचार्जिंग और अव्यवस्थित सेवाओं ने नुकसान पहुंचाया है। वर्ष 2024 में भारत में 1.2 करोड़ विदेशी पर्यटक आए, लेकिन पर्यटन क्षमता के लिहाज से थाईलैंड, दुबई और वियतनाम जैसे देश आगे निकल चुके हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर महंगी टैक्सी, आगरा में नकली संगमरमर और वाराणसी में जबरन दक्षिणा जैसी शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। एक नकारात्मक अनुभव हजारों संभावित पर्यटकों को प्रभावित करता है। प्रशिक्षित स्थानीय युवा यदि पर्यटक का स्वागत करे, सही होटल उपलब्ध कराए, उचित मूल्य पर खरीदारी कराए और सुरक्षा का भरोसा दिलाए, तो वही पर्यटक भविष्य में और लोगों को भारत आने के लिए प्रेरित करेगा।

पर्यटन क्षेत्र रोजगार का बड़ा स्रोत है। विश्व स्तर पर हर दस में से एक नौकरी पर्यटन से जुड़ी है, जबकि भारत में यह अनुपात अभी लगभग आठ प्रतिशत है। इस योजना से पांच हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, लेकिन इसका प्रभाव इससे कहीं व्यापक होगा। एक संतुष्ट पर्यटक टैक्सी चालक, होटल कर्मचारी, हस्तशिल्पी और रेस्तरां संचालक सहित कई स्थानीय लोगों की आय बढ़ाता है। इस दृष्टि से पांच हजार कल्चरल एंबेसडर हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ सकते हैं।

खजुराहो के राजू कुशवाहा जैसे युवा, जो पहले महानगरों में छोटी नौकरी तलाश रहे थे, अब अपने क्षेत्र में रहकर सम्मानजनक आय अर्जित करने की उम्मीद कर रहे हैं। ओरछा की अंजली रैकवार जैसी युवतियां भी इसे सुरक्षित और सम्मानजनक करियर के रूप में देख रही हैं। इस दृष्टि से यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और रिवर्स माइग्रेशन को भी बढ़ावा दे सकती है।

हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं। तीन माह में उत्कृष्ट गाइड तैयार करना आसान नहीं है। भाषा, व्यवहार और इतिहास पर मजबूत पकड़ जरूरी होगी। इसके लिए आईआईटीटीएम ने आईआईएम इंदौर और टीसीएस के सहयोग से एआई आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने की पहल की है। दूसरी चुनौती स्थानीय गाइड सिंडिकेट और दलाल तंत्र की है, जिससे निपटने के लिए पर्यटन मंत्रालय स्मार्ट गाइड ऐप लाने की तैयारी कर रहा है। इसके माध्यम से पर्यटक सीधे प्रमाणित एंबेसडर बुक कर सकेंगे, निर्धारित शुल्क पर डिजिटल भुगतान होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।

भविष्य की योजना 2028 तक 50 शहरों में 50 हजार कल्चरल एंबेसडर तैयार करने की है। अगले चरण में वाराणसी, बोधगया, उदयपुर, हम्पी और कोणार्क जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल किया जाएगा। "देखो अपना देश" अभियान के तहत घरेलू पर्यटकों को भी इन सेवाओं का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही महिला पर्यटकों की सुविधा के लिए 40 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने तथा हेरिटेज, वाइल्डलाइफ, एडवेंचर और फूड टूरिज्म जैसे विषय आधारित विशेषज्ञ एंबेसडर तैयार करने की भी योजना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि पर्यटन आतंकवाद को परास्त कर सकता है, लेकिन पर्यटन तभी बढ़ेगा जब पर्यटक को ठगी नहीं, अपनापन मिलेगा। ग्वालियर की यह पहल उसी अपनत्व को पेशेवर स्वरूप देने का प्रयास है। ये पांच हजार युवा केवल गाइड नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर के प्रतिनिधि होंगे। जब ओरछा का युवा किसी विदेशी पर्यटक को बेतवा की आरती का अनुभव कराएगा या खजुराहो की युवती किसी विदेशी शोधकर्ता को चंदेल कला की व्याख्या करेगी, तब भारत की पहचान केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि अपने आत्मीय व्यवहार से बनेगी। "अतिथि देवो भव" तब केवल नारा नहीं, बल्कि रोजगार, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय पहचान का सशक्त माध्यम बन जाएगा।

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