कोलकाता, 31 मार्च।
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर अगले महीने होने वाले दो चरणों के चुनाव में अधिकतर क्षेत्रों में चार दलों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा, लेकिन दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग की तीन पहाड़ी सीटों पर इस बार पांच पार्टियों के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है।
राज्य की अधिकांश सीटों पर मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा-आईएसएफ गठबंधन और कांग्रेस के बीच है। लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों की तीन सीटों में चुनावी समीकरण पूरी तरह अलग हैं।
इन पहाड़ी सीटों पर भाजपा (गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थन के साथ), भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा, इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट, वाम मोर्चा-आईएसएफ गठबंधन और कांग्रेस के बीच मुकाबला होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के अलग से चुनाव लड़ने से दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और कर्सियांग में चुनावी गणित जटिल हो गया है, क्योंकि इन क्षेत्रों में गोरखा मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
भाजपा और उसके सहयोगी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा का कहना है कि इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट की मौजूदगी से भाजपा विरोधी मत बंटेंगे, जबकि भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इससे भाजपा-गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के पारंपरिक वोट प्रभावित होंगे और उनके उम्मीदवारों के जीतने की संभावना बढ़ेगी।
इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के प्रमुख अजय एडवर्ड्स ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य तीनों सीटें जीतना और अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि उनका दल किसी का वोट काटने के लिए नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक मुद्दों पर चुनाव लड़ रहा है।
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के महासचिव रोशन गिरी ने बताया कि उनकी पार्टी ने भाजपा का समर्थन इस लिए किया क्योंकि छोटे राज्यों के गठन पर भाजपा का रुख सकारात्मक रहा है। वहीं भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के संस्थापक अनित थापा ने कहा कि उनका मुख्य फोकस पहाड़ी क्षेत्रों के विकास पर है और इसके लिए तृणमूल कांग्रेस का समर्थन आवश्यक है।












