नई दिल्ली, 24 अप्रैल।
एल नीनो नामक जलवायु पैटर्न के इस वर्ष मई से शुरू होने की संभावना जताई गई है, जिससे वैश्विक तापमान और वर्षा के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति धरती की जलवायु प्रणाली पर व्यापक असर डाल सकती है।
संगठन के अनुसार एल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर की सतही जलधारा का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। यह स्थिति आमतौर पर नौ से बारह महीने तक बनी रहती है और इसके प्रभाव दूरगामी होते हैं।
विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मई से जुलाई के बीच एल नीनो के विकसित होने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है।
विशेषज्ञों ने बताया कि वर्ष की शुरुआत में जहां जलवायु स्थिति सामान्य थी, वहीं अब विभिन्न मॉडल एकमत होकर इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि एल नीनो की शुरुआत लगभग तय मानी जा रही है और आने वाले महीनों में इसकी तीव्रता और बढ़ सकती है।
हालांकि जलवायु मॉडल इस वर्ष एक मजबूत एल नीनो की ओर संकेत कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि वसंत ऋतु में की गई भविष्यवाणियाँ अपेक्षाकृत कम सटीक होती हैं और अप्रैल के बाद ही अधिक स्पष्टता संभव हो पाएगी।
यह मौसमी प्रणाली क्षेत्रीय जलवायु पर गहरा प्रभाव डालती है। इसके कारण दक्षिणी दक्षिण अमेरिका, दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका, अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र तथा मध्य एशिया में अधिक वर्षा की संभावना बन सकती है, वहीं ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही यह वैश्विक तापमान को भी बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है।











