नई दिल्ली, 29 अप्रैल
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने देश में अप्रेंटिसशिप व्यवस्था को मजबूत करने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में इसकी भागीदारी बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत आयोजित उच्च स्तरीय परामर्श कार्यशाला में भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने की दिशा में व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में एमएसएमई क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया। साथ ही क्लस्टर आधारित मॉडल, सीखते हुए कमाई करने की व्यवस्था और कार्य-एकीकृत प्रशिक्षण जैसे मॉडलों की व्यवहारिकता पर भी चर्चा हुई।
मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के बावजूद यह व्यवस्था मुख्य रूप से बड़े और मध्यम उद्योगों तक सीमित है। वर्तमान में अधिकांश अप्रेंटिस निजी क्षेत्र से जुड़े हुए हैं, जिससे छोटे उद्यमों के लिए विशेष समाधान की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
मंत्रालय की सचिव ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत संबंध स्थापित करना आवश्यक है, ताकि युवाओं की क्षमता को अवसरों में बदला जा सके। उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और यदि यहां अप्रेंटिसशिप को सरल बनाया जाए तो बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
बैठक में विभिन्न हितधारकों ने जागरूकता की कमी और जटिल प्रक्रियाओं जैसी बाधाओं पर चर्चा की और पायलट परियोजनाओं तथा नीति सुधारों के लिए सुझाव दिए। इसके साथ ही समावेशी अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया, विशेषकर महिलाओं, दिव्यांगों और वंचित वर्गों के लिए।
मंत्रालय ने बताया कि एक समन्वित कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें जिम्मेदारियां और समयसीमा तय की गई हैं, ताकि अप्रेंटिसशिप को व्यापक स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।











