भोपाल, 02 मई।
मध्य प्रदेश में इस वर्ष रबी फसलों का संकट ग्लोबल वार्मिंग के कारण गहराता जा रहा है। मौसम की अचानक बदलती स्थितियों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फरवरी-मार्च में अचानक बढ़ी गर्मी और फिर अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश ने फसलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम के इस बदलाव से किसानों की फसलों पर सीधा असर पड़ा है और इस बदलाव के कारण फसल उत्पादन में गिरावट आई है।
मौसम में बदलाव के चलते किसानों को इस वर्ष रबी फसलों में समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अचानक तापमान बढ़ने के कारण गेहूं की फसल जल्दी पक गई, जिससे दाने का आकार छोटा हो गया। इसके बाद हुई बारिश ने फसलों की गुणवत्ता को और खराब किया। कृषि विज्ञानियों के अनुसार, यह बदलाव ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम है, जो पूरे देश और दुनिया में महसूस हो रहा है। इस बदलाव के कारण कीटों और रोगों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे फसलों का उत्पादन घट रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि खेतों की मिट्टी भी प्रभावित हो रही है। जब अत्यधिक तापमान होता है, तो मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों और पोषक तत्वों पर बुरा असर पड़ता है। किसान अगर नरवाई को जलाते हैं, तो इससे खेत का तापमान बढ़ जाता है, जिससे मिट्टी के लाभकारी जीवों और कीटों पर नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसे में विशेषज्ञों का सुझाव है कि नरवाई का इस्तेमाल खाद बनाने में किया जाए, ताकि जमीन में जैविक पदार्थ की मात्रा बनी रहे।
इसके साथ ही, गिरते भूजल स्तर की समस्या भी गंभीर बन गई है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता घट रही है। किसान अब ऐसी सिंचाई पद्धतियों का उपयोग कर सकते हैं, जिनसे कम पानी का इस्तेमाल हो और पानी की बर्बादी रोकी जा सके। स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम जैसी सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल किसानों को फसल की सिंचाई में मदद कर सकता है।










