नई दिल्ली, 22 मई ।
गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ रक्तचाप मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है। विश्व प्रीक्लेम्पसिया दिवस के अवसर पर एम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि 140/90 से अधिक रक्तचाप को किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।
अस्पताल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें उच्च रक्तचाप के साथ-साथ शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों, विशेषकर किडनी और लिवर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। समय रहते पहचान और उपचार न होने पर यह स्थिति मां और शिशु दोनों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि लगातार सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, हाथ-पैरों में सूजन, अचानक वजन बढ़ना और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। नियमित जांच और रक्तचाप की निगरानी से इस बीमारी का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सकता है।
डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार के उच्च रक्तचाप को हल्के में न लें और समय-समय पर चिकित्सकीय जांच अवश्य कराएं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रीक्लेम्पसिया की स्क्रीनिंग गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर कम मात्रा में एस्पिरिन देने से गंभीर प्रीक्लेम्पसिया का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही नियमित प्रसवपूर्व जांच और चेतावनी संकेतों पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।




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