राजनीति
27 May, 2026

एसआईआर फैसले पर कांग्रेस का हमला, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया में खामियों, समय सीमा और मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं।

नई दिल्ली, 27 मई ।

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अदालत ने एसआईआर की संवैधानिक वैधता को स्वीकार किया है, लेकिन निर्णय में कई ऐसे पहलू हैं जो चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

सिंघवी ने कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है, बल्कि यह अधिकार गृह मंत्रालय जैसे सक्षम प्राधिकरण के पास है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने से उनका मताधिकार प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के पैरा 97 से 101 तक के अवलोकन से यह स्पष्ट होता है कि एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने और बाद में उनमें से कई के नाम पुनः सूची में शामिल किए जाने को उन्होंने राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की याचिकाओं का परिणाम बताया।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने जल्दबाजी में यह प्रक्रिया लागू की, जिससे कई खामियां सामने आईं। उनका कहना था कि यदि राजनीतिक दलों और सिविल सोसायटी ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो ये त्रुटियां अनसुलझी रह जातीं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या अत्यंत कम समय सीमा रही है, जिसमें बिहार में चार महीने और पश्चिम बंगाल में पांच महीने का समय दिया गया। उनके अनुसार यदि यह प्रक्रिया चुनाव से अलग समय पर लागू होती तो इतनी जटिलताएं नहीं पैदा होतीं।

सिंघवी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पहले नाम हटाने की कार्रवाई करता है और बाद में आपत्ति निवारण की प्रक्रिया चलती है, जिससे कई बार चुनाव पहले ही संपन्न हो जाते हैं और प्रभावित मतदाता न्याय से वंचित रह जाते हैं।

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने आधार और राशन कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना है, जबकि चुनाव आयोग द्वारा कई अन्य दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की गई, जिससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां अपील प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नामों को पुनः सूची में शामिल किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में त्रुटियां हुई थीं।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध ठहराते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है, लेकिन नागरिकता का अंतिम निर्धारण चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

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