नई दिल्ली, 25 मई।
उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार में शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े निर्णय को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया को केवल इसलिए अवैध नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह सामान्य मतदाता सूची पुनरीक्षण से भिन्न है, साथ ही मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे वैध और संवैधानिक प्रक्रिया माना है।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यह प्रक्रिया विधि सम्मत है और निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाया गया विशेष गहन पुनरीक्षण स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक उद्देश्य के अनुरूप है, जिससे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया के दौरान आवश्यक होने पर नागरिकता की जांच करने का अधिकार प्राप्त है, जिससे सूची की प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने 29 जनवरी को निर्णय सुरक्षित रखा था, जबकि निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह प्रक्रिया संविधान में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही संचालित की जा रही है और इसका उद्देश्य केवल मतदाता सूची को शुद्ध एवं अद्यतन करना है।















