कोलकाता, 27 मई ।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता को आधिकारिक मान्यता नहीं मिलने के मुद्दे पर बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय की ओर से अब तक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता का औपचारिक दर्जा नहीं दिया गया है, जिससे संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर बालीगंज विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय और बेलियाघाटा विधायक कुणाल घोष विधानसभा भवन पहुंचे और स्पीकर रथीनाथ बसु से मुलाकात का प्रयास किया। तृणमूल नेताओं का आरोप है कि मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद दोनों नेता स्पीकर कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए और विधानसभा सचिवालय के रवैये पर नाराजगी जताई।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि 18वीं विधानसभा के गठन और पहले सत्र के समाप्त होने के बावजूद विपक्ष के नेता को न तो आधिकारिक मान्यता दी गई है और न ही उनके लिए निर्धारित कार्यालय उपलब्ध कराया गया है। पार्टी नेताओं ने इसे संसदीय परंपराओं और शिष्टाचार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि लंबे समय से विधायक रहे शोभनदेव चट्टोपाध्याय को अब तक कमरा आवंटित नहीं किया गया है और उनके पत्र की प्राप्ति रसीद तक नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि सचिवालय की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण संसदीय दल की बैठकें भी प्रभावित हो रही हैं।
तृणमूल नेताओं ने सवाल उठाया कि जब स्पीकर और मुख्यमंत्री के कक्ष तैयार हो चुके हैं, तब विपक्ष के नेता के लिए अब तक कार्यालय क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने इस मामले में स्पीकर से मुलाकात नहीं हो पाने पर भी नाराजगी जताई।
पार्टी का दावा है कि 13 मई को स्पीकर को पत्र भेजकर 80 विधायकों के समर्थन के साथ शोभनदेव चट्टोपाध्याय को संसदीय दल का नेता घोषित किए जाने की जानकारी दे दी गई थी, लेकिन अब तक उन्हें विपक्ष के नेता का आधिकारिक दर्जा नहीं मिला है।
उल्लेखनीय है कि 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त करने के लिए कम से कम 30 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।









