सरकार व नीतियाँ
27 May, 2026

चारधाम यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नई एसओपी लागू, क्षमता और निगरानी व्यवस्था तय

उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नई एसओपी लागू कर दी है, जिसमें पंजीकरण, क्षमता सीमा, निगरानी और पशु कल्याण से जुड़े सख्त प्रावधान शामिल हैं।

देहरादून, 27 मई ।

उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार नई एसओपी का निर्माण उच्च न्यायालय नैनीताल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के अनुरूप किया गया है। इसके तहत यात्रा मार्गों की वहन क्षमता निर्धारित की गई है, जिसमें केदारनाथ मार्ग पर अधिकतम पांच हजार, हेमकुंड साहिब पर लगभग 1050 और यमुनोत्री मार्ग पर करीब 595 पशुओं के संचालन की अनुमति दी गई है।

नई व्यवस्था में सभी घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण से पहले स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, ईयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग जरूरी होगी। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिन तय की गई है, जिसके बाद पुनः जांच अनिवार्य होगी। अपंजीकृत पशुओं के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

एसओपी में पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक एक किलोमीटर पर स्वच्छ पानी, चारा और इलेक्ट्रोलाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हल्की और वाटरप्रूफ काठी के उपयोग पर भी जोर दिया गया है ताकि पशुओं को चोट से बचाया जा सके।

निगरानी व्यवस्था के तहत यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और प्रत्येक जिले में अधिकारियों व पशु चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। घायल या बीमार पशुओं से कार्य लेने, अधिक भार ढोने, पिटाई करने, तेज गति से चलाने और बिना टोकन संचालन जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और भारतीय न्याय संहिता के तहत दोषी पाए जाने पर पशु स्वामी का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और एफआईआर दर्ज की जाएगी।

नई एसओपी के अनुसार प्रत्येक पशु के साथ संचालक की उपस्थिति अनिवार्य होगी। एक व्यक्ति अधिकतम दो पशुओं का ही संचालन कर सकेगा और प्रतिदिन केवल एक टोकन जारी किया जाएगा। सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद पशुओं का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

यात्रा मार्गों पर खराब मौसम की स्थिति जैसे बारिश, ओलावृष्टि या बर्फबारी में भी पशु संचालन पर रोक रहेगी। इसके साथ ही स्थायी और अस्थायी पशु चिकित्सालय, 24 घंटे इन्फर्मरी, अतिरिक्त चेक पोस्ट, डिजिटल रिकॉर्डिंग, म्यूल टास्क फोर्स और 24x7 हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी।

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