नई दिल्ली, 27 मई ।
उत्तर भारत में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं अब केवल श्वसन तंत्र तक सीमित खतरा नहीं रहा, बल्कि यह रक्तचाप को भी प्रभावित कर रहा है, यह खुलासा एम्स के एक नए अध्ययन में सामने आया है।
अध्ययन के अनुसार फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न धुएं के संपर्क में रहने वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में अपेक्षाकृत स्वच्छ वातावरण वाले क्षेत्रों की तुलना में उच्च रक्तचाप विकसित होने की संभावना लगभग 15 प्रतिशत अधिक पाई गई है। इस विषय पर कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ ने बताया कि यह निष्कर्ष एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती की ओर संकेत करता है।
विशेषज्ञ के अनुसार देश में उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों की संख्या अब संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों से भी अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि केवल उच्च रक्तचाप के कारण हर वर्ष लगभग सोलह लाख लोगों की मृत्यु हो रही है, जबकि देश में लगभग तीस करोड़ लोग इस समस्या से प्रभावित हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च रक्तचाप के लक्षण अधिकतर मामलों में दिखाई नहीं देते, इसलिए समय पर जांच अत्यंत आवश्यक है। अनियंत्रित रक्तचाप की स्थिति में हृदयाघात, मस्तिष्क आघात और गुर्दे की विफलता जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग पच्चीस प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में लगभग तैंतीस प्रतिशत वयस्क इस समस्या से प्रभावित पाए गए हैं, जिसके चलते देशभर में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान की आवश्यकता बताई गई है।










