जोधपुर, 05 जून।
ऑनलाइन बीमा पॉलिसी खरीदना एक उपभोक्ता को उस समय भारी पड़ गया, जब दुर्घटना के बाद उनका दावा (क्लेम) अधूरा मिला और पॉलिसी फर्जी साबित हुई। राज्य उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नेशनल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस दोनों को जिम्मेदारी साझा करने के निर्देश दिए हैं।
जालोर निवासी उपभोक्ता कानाराम ने 2021 में 'पॉलिसी बाजार' के जरिए नेशनल इंश्योरेंस से वाहन बीमा कराया था, जिसमें उन्हें 50 फीसदी 'नो क्लेम बोनस' (NCB) का लाभ मिला। जून 2022 में दुर्घटना होने पर उन्हें केवल 69,729 रुपये ही मिले, जबकि मरम्मत का खर्च 3.35 लाख रुपये से अधिक था। जांच में पता चला कि उपभोक्ता को दी गई पॉलिसी नंबर उसी नंबर पर किसी अन्य व्यक्ति को भी जारी की गई थी, जो एक बड़ी कूटरचना को दर्शाता है।
राज्य आयोग के सदस्य मुकेश और लियाकत अली ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी का यह दायित्व था कि वह 15 दिनों के भीतर पूर्व पॉलिसी और एनसीबी का सत्यापन करे, जिसमें वे विफल रहे। आयोग ने नेशनल इंश्योरेंस को सर्वेयर की रिपोर्ट के अनुसार कुल नुकसान का 80 फीसदी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को 20 फीसदी भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही, 'पॉलिसी बाजार' को उपभोक्ता कल्याण कोष में 50,000 रुपये जमा कराने का दंड दिया और पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक जालोर को निर्देश जारी किए।













