मुंबई, 12 जून।
महाराष्ट्र में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पादों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 3.27 करोड़ रुपये मूल्य का अवैध सामान जब्त किया है। राज्यभर में हाल के सप्ताहों में हुई छापेमारी के दौरान 35 से अधिक मामले भी दर्ज किए गए हैं।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पदभार संभालने के बाद इस अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में गुटखा, पान मसाला, निकोटीन युक्त उत्पादों और अन्य प्रतिबंधित तंबाकू मिश्रित खाद्य पदार्थों की अवैध बिक्री को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे संगठित नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, जो उत्पादन से लेकर वितरण और बिक्री तक की पूरी श्रृंखला में शामिल हैं। गंभीर मामलों में मकोका के तहत कार्रवाई करने को भी कहा गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कार्रवाई से पहले आरोपितों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाए।
राज्य के विभिन्न जिलों में की गई छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित और मिलावटी उत्पाद जब्त किए गए हैं। कई विक्रेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है। इसके अलावा अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है।
एफडीए ने कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से जुड़े आरोपों को भी गंभीरता से लिया है। विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
इस बीच आयुक्त ने अस्पतालों में दवा पारदर्शिता को लेकर भी नए निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाओं की पर्ची मरीजों या उनके परिजनों को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, ताकि वे अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार किसी भी पंजीकृत फार्मेसी से दवा खरीद सकें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी विशेष ब्रांड की दवा उपलब्ध नहीं है तो उसका जेनेरिक विकल्प खरीदा जा सकता है। यह व्यवस्था केवल सलाह नहीं, बल्कि सरकारी आदेश है और इसका पालन सभी अस्पतालों के लिए अनिवार्य रहेगा।
एफडीए ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।










