नई दिल्ली, 10 जून ।
अमेरिका में एच-1बी वीजा आवेदन पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए एक लाख डॉलर शुल्क को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। संघीय अदालत ने इस शुल्क को रद्द करते हुए इस नीति पर रोक लगा दी है, जिसके बाद कई राज्यों ने इसे कुशल विदेशी पेशेवरों और संस्थानों के लिए बड़ी राहत बताया है।
यह शुल्क 21 सितंबर 2025 के बाद दाखिल किए गए नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर लागू किया गया था। लेकिन कई अमेरिकी राज्यों के गठबंधन ने इस नीति को अदालत में चुनौती देते हुए कहा था कि बिना कांग्रेस की अनुमति के इस प्रकार का शुल्क लगाना कानूनी रूप से उचित नहीं है।
मैसाचुसेट्स की संघीय जिला अदालत ने अपने अंतिम फैसले में इस शुल्क व्यवस्था को खारिज कर दिया, जिससे सरकार की यह नीति प्रभावी रूप से समाप्त हो गई।
वॉशिंगटन राज्य के अटॉर्नी जनरल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय राज्य के लिए कुशल कार्यबल को बनाए रखने और वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा मजबूत करने में मदद करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह शुल्क लागू रहता, तो इससे सरकारी एजेंसियों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता और एआई, साइबर सुरक्षा तथा चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की भर्ती प्रभावित होती।
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल ने भी अदालत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह निर्णय उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार यह शुल्क अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं के लिए आवश्यक प्रतिभा की उपलब्धता को बाधित करता, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता।
इस फैसले के बाद राज्यों ने कहा है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था प्रतिभा आधारित विकास पर निर्भर करती है और इस तरह की नीतियां उस संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।










