मध्य प्रदेश
10 Jun, 2026

इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन: विदेशी मेहमानों ने राजवाड़ा में जाना इतिहास, चखा पोहा-जलेबी का स्वाद

इंदौर में आयोजित पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के दूसरे दिन 20 से अधिक देशों के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा में हेरिटेज वॉक कर मालवी संस्कृति का अनुभव किया।

इंदौर, 10 जून।

मध्य प्रदेश की व्यापारिक और सांस्कृतिक राजधानी में आयोजित पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के द्वितीय दिवस पर आज सुबह विदेशी अतिथियों को मालवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक आतिथ्य सत्कार की अनूठी झलक देखने को मिली। सम्मेलन में पहुंचे विभिन्न ब्रिक्स सदस्य देशों सहित दुनिया के 20 से अधिक देशों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विख्यात कृषि विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक राजवाड़ा पैलेस में हेरिटेज वॉक के माध्यम से शहर के गौरवशाली इतिहास को अत्यंत निकटता से समझा। इस सांस्कृतिक भ्रमण के पश्चात समस्त प्रतिनिधियों ने ग्रामीण हाट का अवलोकन किया, जहां उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों, जैविक खेती और ग्रामीण उद्यमशीलता के विविध स्वरूपों की सराहना की।

अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित विभिन्न देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं। इन मेहमानों के लिए सुबह के सत्र में हेरिटेज वॉक का विशेष आयोजन किया गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह वॉक पहले बोलिया सरकार छतरी से प्रारंभ होनी थी, किंतु समय प्रबंधन के तहत विदेशी मेहमान सुबह साढ़े छह बजे सीधे ऐतिहासिक राजवाड़ा पहुंचे। वहां आगमन पर समस्त विदेशी आगंतुकों का पारंपरिक भारतीय पद्धति से भव्य स्वागत सत्कार किया गया। इस अवसर पर होलकर राजवंश के ऐतिहासिक दरबार की जीवंत झांकी, हरकारों की पारंपरिक गूंज और सुमधुर शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने विदेशी प्रतिनिधियों को भारतीय संस्कृति की महानता से रूबरू कराया। प्रख्यात इतिहासकारों ने मेहमानों को लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन दर्शन और होलकर शासनकाल के गौरवशाली ऐतिहासिक प्रसंगों से अवगत कराया।

सांस्कृतिक यात्रा के अगले चरण में सभी विदेशी प्रतिनिधि प्रसिद्ध गोपाल मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्होंने प्राचीन भवनों के स्तंभों पर की गई बारीक लकड़ी की नक्काशी और अद्भुत स्थापत्य कला का गहराई से निरीक्षण किया। विदेशी राजनयिक मंदिर परिसर की भव्यता, नक्काशी और उसके ऐतिहासिक महत्व से अत्यंत प्रभावित दिखाई दिए। इस यात्रा के दौरान विदेशी मेहमानों को इंदौर के विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक नाश्ते पोहा-जलेबी का स्वाद भी चखाया गया, जिसकी उन्होंने चाय-कॉफी की चुस्कियों के साथ भूरि-भूरि प्रशंसा की।

इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य तकनीकी सत्रों में खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों, कृषि क्षेत्र में आधुनिक नवाचार, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गंभीर मंथन का दौर जारी है। आज के सत्र में सम्मेलन के संयुक्त घोषणा-पत्र के अंतिम मसौदे पर भी व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा, और संध्याकाल में सदस्य राष्ट्रों के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापारिक बैठकें आयोजित की जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि सम्मेलन के प्रथम दिन भारत और रूस के मध्य एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को गति देने, तकनीकी सहयोग को और सुदृढ़ करने तथा वैश्विक खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों मित्र राष्ट्रों ने जलवायु-अनुकूल खेती और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में पारस्परिक साझेदारी बढ़ाने पर पूर्ण सहमति व्यक्त की। 9 से 13 जून तक संचालित होने वाले इस भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन के संबंध में नीतिगत विशेषज्ञों का मानना है कि यह महासम्मेलन मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण और वैश्विक निर्यात के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा, और राज्य में निवेश एवं तकनीकी सहयोग के नए द्वार खोलेगा।

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