यमन, 28 मार्च।
पश्चिम एशिया में पिछले 29 दिनों से जारी संघर्ष के बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है, जो अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने अल मसीरा चैनल पर हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उनके निर्धारित लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। मिसाइलों को मुख्य रूप से दक्षिणी इजराइल के संवेदनशील सैन्य ठिकानों पर दागा गया।
इजराइली सेना ने दावा किया कि एक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया। हमले के दौरान बीरशेबा और प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के आस-पास सायरन बजते रहे, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हिज़्बुल्लाह और ईरान पहले से ही इजराइल के खिलाफ संघर्ष में शामिल हैं, जिससे युद्ध के और व्यापक होने की संभावना बढ़ गई है।
हूती विद्रोहियों ने पहले भी लाल सागर में व्यापारिक जहाज़ों को निशाना बनाया, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ। नवंबर 2023 से जनवरी 2025 के बीच उन्होंने 100 से अधिक जहाज़ों पर हमला किया, जिनमें दो डूब गए और चार नाविकों की मौत हुई।
उन्होंने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी भी दी है, जो वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है और इससे स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी प्रमुख समुद्री मार्गों पर भी असर पड़ सकता है।
दक्षिणी लेबनान से हुए रॉकेट हमलों में नौ इज़रायली सैनिक घायल हुए हैं। माना जा रहा है कि इज़राइल इस हमले का जवाब दे सकता है, जिससे संघर्ष और तेज़ होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के नए मोर्चे खुलने से इज़राइल की सैन्य रणनीति और सरकार के फैसलों पर भी सवाल उठ सकते हैं। हूती विद्रोहियों के हमले ने मध्य पूर्व के युद्ध को और जटिल बना दिया है, और इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा पड़ सकता है।





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