मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री ईरान–इज़रायल तनाव और अमेरिका की भागीदारी के चलते गंभीर संकट में है, जिससे उत्पादन, निर्यात और वैश्विक दवा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ा है।
भोपाल, 03 अप्रैल।
मध्य प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है, जिसका प्रमुख कारण ईरान–इज़रायल तनाव और इसमें अमेरिका की बढ़ती भागीदारी है। यह केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, विशेषकर दवा उद्योग, पर गहराई से पड़ रहा है। प्रदेश की 100 से अधिक फार्मा कंपनियों का निर्यात लगभग शून्य हो जाना इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
सप्लाई चेन का टूटना और समुद्री मार्गों का संकट दवा उद्योग को सबसे बड़ा झटका अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर लगा है। रेड सी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग युद्ध के खतरे के कारण असुरक्षित हो गए हैं। परिणामस्वरूप शिपिंग कंपनियों ने अपने संचालन सीमित या बंद कर दिए हैं। इससे भारत से लगभग 190 देशों को होने वाली दवा सप्लाई बाधित हो गई है।
जहाजों के समुद्र में उतरने से इनकार और बुकिंग के स्थगन ने निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक्स को लगभग ठप कर दिया है। इससे “जस्ट इन टाइम” मॉडल पर निर्भर वैश्विक दवा बाजार में आपूर्ति संकट गहराने की आशंका है।
लागत में अप्रत्याशित वृद्धि इस संकट का दूसरा बड़ा पहलू है। कंटेनर किराया 40% तक बढ़ चुका है—अफ्रीका जाने वाले 40 फीट कंटेनर का किराया 3.5 लाख से बढ़कर 4.5 लाख रुपये तक पहुंच गया है। चीन से आने वाले कंटेनर का किराया भी दोगुना हो चुका है।
बीमा क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। समुद्री हमलों के जोखिम के कारण बीमा कंपनियां कवरेज देने से बच रही हैं। जहां बीमा मिल रहा है, वहां प्रीमियम इतना अधिक है कि कुल लॉजिस्टिक लागत उत्पादन लागत से भी ज्यादा हो गई है। यह स्थिति निर्यात को आर्थिक रूप से अव्यवहारिक बना रही है।
उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ा है। कच्चे माल की कमी और निर्यात में रुकावट के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। जो कंपनियां पहले 24 घंटे तीन शिफ्ट में काम करती थीं, वे अब केवल एक शिफ्ट में सिमट गई हैं। पैकेजिंग सामग्री में 20% और पीवीसी की कीमतों में 30% तक वृद्धि ने लागत दबाव को और बढ़ा दिया है।
पीथमपुर, जो प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, वहां की कंपनियां इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हैं। यहां लगभग 5600 उद्योग कच्चे माल के लिए 60% तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं।
मिडिल ईस्ट पर निर्भरता एक रणनीतिक कमजोरी साबित हो रही है। सऊदी अरब, कतर और बहरीन जैसे देशों से आने वाले बल्क ड्रग्स और पेट्रोकेमिकल सप्लाई पूरी तरह बाधित हो चुकी है। यह दर्शाता है कि भारतीय फार्मा उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला अत्यधिक क्षेत्र-विशिष्ट निर्भरता पर आधारित है, जो संकट के समय बड़ी कमजोरी बन जाती है।
वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर संभावित प्रभाव भी गंभीर हैं। यूएई, ओमान और सऊदी अरब जैसे देश अपनी सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारतीय दवाओं पर निर्भर हैं। यदि यह स्थिति 10–15 दिन और बनी रहती है, तो आवश्यक दवाओं की वैश्विक कमी उत्पन्न हो सकती है। “जस्ट इन टाइम” इन्वेंटरी सिस्टम के कारण इन देशों के पास अतिरिक्त स्टॉक नहीं होता, जिससे संकट और गहरा सकता है।